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दिल्ली में लगने लगी स्पूतनिक-V वैक्सीन,

newsmrl.com Sputnik-V vaccine started in Delhi, update by rajinedr Singh

दिल्ली में रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज के स्टाफ को लगाई जा रही है

रविवार को अपोलो अस्पताल में यह वैक्सीन लॉन्च की गई। रेड्डी लैबोरेट्रीज के लगभग 170 स्टाफ को वैक्सीन लगाई गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पहले 15 जून से आम लोगों के लिए स्पूतनिक-वी की शुरुआत करने की योजना थी, लेकिन अभी यह केवल लैब के स्टाफ के लिए है। अपोलो में इसकी शुरुआत हुई है, जहां वैक्सीनेशन स्टाफ अस्पताल का है और बाकी सुविधाएं रेड्डीज लैबोरेट्रीज की हैं।

20 जून से इस वैक्सीन के लोगों के लिए उपलब्ध होने की संभावना है। इसके लिए पहले कोविन पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा और अपना स्लॉट बुक करना होगा। केंद्र सरकार द्वारा प्राइवेट अस्पतालों में स्पूतनिक-वी की एक खुराक की कीमत 1145 रुपये निर्धारित की गई है। यह वैक्सीन पहली दोनों वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन से कई मायनों में अलग है। इस वैक्सीन की क्षमता बाकी दोनों से कहीं ज्यादा 91 पर्सेंट तक है। इसकी दोनों डोज अलग-अलग होगी और इस वैक्सीन को माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना होगा।

यह वैक्टर्ड वैक्सीन है। इसमें दो प्रकार के एडिनोवायरस का इस्तेमाल हुआ है-पहला सीरोटाइप 26 और दूसरा सीरोटाइप 5। इस वजह से इस वैक्सीन की दोनों डोज अलग-अलग होगी। वैक्सीन की दोनों डोज के 42 दिन बाद पर्याप्त एंटीबॉडी बनने की बात कही गई है। कोविड एक्सपर्ट डॉक्टर अंशुमान कुमार के अनुसार, अधिकांश वैक्सीन बनाने में एडिनोवायरस का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि यह कोविड के वायरस से बड़ा होता है और इसे जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है।

डॉक्टर ने कहा कि जब कोई फॉरन बॉडी शरीर में जाता है, चाहे वैक्सीन हो या वेक्टर हो, बॉडी उसके खिलाफ एक्टिव हो जाता है। पहली डोज में जिस वेक्टर का इस्तेमाल हुआ है, अगर वही वेक्टर दोबारा इस्तेमाल होता तो बॉडी उसे पहचान लेती और उसके खिलाफ एक्टिव हो जाती और उसे रोकने की कोशिश करती। इस वजह से दूसरे टाइप का वेक्टर डाला गया है, ताकि वैक्सीन जल्दी कारगर हो। इस वजह से दूसरी डोज के लिए लंबा इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। यह ज्यादा कारगर होगा और दूसरी डोज 3 हफ्ते में लेनी होगी।

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