RAIPUR : निर्वाचन आयोग ने ऑफिस ऑफ प्राफिट के एक मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। इसकी वजह से वहां राजनीतिक संकट गहरा गया है। झारखंड में सत्ताधारी महागठबंधन के 32 विधायकों सहित 41 नेता मंगलवार शाम रायपुर पहुंचे थे। उन्हें नवा रायपुर के मेफेयर रिसॉर्ट में ठहराया गया।
मंगलवार को आबकारी विभाग की एक गाड़ी से नवा रायपुर के उसी मेफेयर रिसार्ट में शराब भेजे जाने का मामला सामने आया जिस रिसॉर्ट में झारखंड के विधायकों को ठहराया जाना था। इसी पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर लिखा, भूपेश जी कान खोलकर सुन लीजिए! छत्तीसगढ़ अय्याशी का अड्डा नहीं है, जो छत्तीसगढ़ियों के पैसे से झारखंड के विधायकों को दारू-मुर्गा खिला रहे हैं। असम, हरियाणा के बाद अब झारखंड के विधायको का डेरा। इन अनैतिक कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ महतारी आपको कभी माफ नहीं करेगी।
शिमला रवाना होने से पहले प्रेस से बात कर इसी का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा जिस प्रकार से महाराष्ट्र में बात चल रही है पचास खोखा,झारखंड में बात चल रही है बीस-बीस खोखा रमन सिंह जी उसका जवाब दें। रमन सिंह को तकलीफ हो रही है क्योंकि अगर खुला छोड़ देते तो वो वहां खरीद फरोख्त करते। मुख्यमंत्री ने कहा, अन्य राज्यों में जब खरीद फरोख्त हो रही थी रमन सिंह चुप क्यों थे? ये तो हमारी पार्टी के लोग हैं। हमारे गठबंधन के लोग हैं। रमन सिंह को यह देखना चाहिए कि कर्नाटक के विधायक, महाराष्ट्र के विधायक, राजस्थान के विधायक ,मध्यप्रदेश के विधायक, दूसरी पार्टी के विधायक जब उठा उठाकर ले गए तब उनकी बोलती बंद क्यों थी? वो चुप क्यों थे? उस समय बोलना था! इसमें उनको तकलीफ क्यों हो रही है। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के सीनियर ऑब्जर्वर के तौर पर कांग्रेस की बैठक लेने शिमला रवाना हुए हैं। दिन भर की बैठकों के बाद उनके शाम तक रायपुर लौट आने का कार्यक्रम है। रायपुर हवाई अड्डे पर रवाना होने से पहले उन्होंने रमन सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ऑफिस ऑफ प्राफिट के एक मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। इसकी वजह से वहां राजनीतिक संकट गहरा गया है। हालांकि राज्यपाल रमेश बैस ने इस सिफारिश पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है। महागठबंधन नेताओं का कहना है, भाजपा उनके विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए तोड़ने की कोशिश कर रही है। इसकी वजह से सभी विधायकों को एक साथ रखने की जरूरत बढ़ गई है।
