राजसमंद विधानसभा सीट की विधायक किरण माहेश्वरी के निधन के बाद खाली हुई
इस सीट पर उपचुनाव काे लेकर पूरे जिले में आचार संहिता लागू हाे गई है। 70 साल पहले विधानसभा बनी इस सीट पर पहली बार उपचुनाव हाे रहे हैं। अब तक 15 बार आम चुनाव हाे चुके हैं। दाेनाें ही दलाें ने अभी प्रत्याशियाें के नाम घाेषित नहीं किए है। इस सीट पर 1951 से अब तक 15 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं।
अब तक सात बार कांग्रेस जीती है। इनमें सर्वाधिक रेलमगरा क्षेत्र के विधायक रहे हैं। जबकि भाजपा में हर बार बाहरी प्रत्याशी ने ही जीत हासिल की है। एक भी बार स्थानीय प्रत्याशी इस सीट पर जीत नहीं पाया है। इस सीट पर 6 बार भाजपा समर्थित विधायक रहे हैं। एक बार एएलपी यानी कृषि लाेक परिषद पार्टी और एक बार जनता पार्टी का विधायक बना है। 20 साल से यह सीट भाजपा की झाेली में रही है। लगातार तीन चुनाव भाजपा की किरण माहेश्वरी ने जीते थे।
निधन तक वे यहां लगातार 12 साल से विधायक रहीं। राजसमंद विधानसभा सीट पहले उदयपुर जिले में शामिल थी। वर्ष 1991 में राजसमंद जिला बना। तब पहले चुनाव हुए। पहले विधायक भाजपा के शांतिलाल खाेईवाल रहे थे। इसके बाद 1993 में मध्यावती चुनाव में फिर से शांतिलाल खाेईवाल ने जीत हासिल की थी।
किरण माहेश्वरी की पुत्री दीप्ति माहेश्वरी ने माता की मौत के पश्चात इस सीट के टिकट पर अपना दावा पेश किया है।वह अपनी मां के अधूरे सपने को पूरा करना चाह रही है।

