छत्तीसगढ़ का बस्तर अपने अंदर प्राचीन आदिवासी पंरपराओं को समेटे हुए है।
बस्तर की सांस्कृतिक विरासत इतनी ज्यादा विस्तृत
कि थोड़े दुर बाद ही अन्य जगह की बोली और वेशभूषा में अंतर आ जाता है। ऐसे ही नारायणपुर के अबूझमाड़ की संस्कृति को मंच प्रदान करने की पहल जिला प्रशासन ने की है। वहां के पारंपरिक परिधान पहनकर स्थानीय युवक-युवतियों ने रैंप पर वॉक किया।
जिले की प्रतिभा को मंच प्रदान करने और अबूझमाड़ संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए अबूझमाड़ परिधान रैंप वॉक प्रतियोगिता का मंगलवार को अंतिम ऑडिशन हुआ। इस दौरान युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा, परिधान एवं आभूषणों से सुसज्जित रंग-बिरंगे परिधान में मंच पर वॉक करते नजर आए। मॉडलों की तरह स्थानीय लोगों को मंच पर वॉक करते देखना किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम से कम नहीं लग रहा था।
दो दिनों तक हुए इस ऑडिशन में 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह प्रतियोगिता जूनियर वर्ग में 18 वर्ष से कम उम्र और सीनियर वर्ग में होगी। मुख्य कार्यक्रम 13 मार्च को माता मावली मेले में होगा। विजेता प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया जाएगा। संयुक्त कलेक्टर निधि साहू ने बताया कि इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा, परिधान और आभूषणों से सुसज्जित युवक-युवतियों ने रैंप पर वॉक कर हर किसी को मोहित किया।
यह प्रशासन द्वारा किया जा रहा अनूठा पहल है जिसके द्वारा बस्तर की संस्कृति को विश्व में अलग ही मंच मिलेगा,लोग यहां की संस्कृति को जानेंगे और समझेंगे।
