यदि यह युद्ध की शुरुआत है, और चीन ने दुनिया भर में जैविक हथियारों का इस्तेमाल किया है, तो यह केवल युद्ध नहीं है, यह दुनिया के अंत की शुरुआत भी है?
अगर कोरोना वास्तव में लैब में बनाया गया है तो इसका मतलब यह वायरस अमर है, और कभी खत्म नहीं होगा, ये साल दर साल चलता रहेगा जब तक इसे वो मनुष्य मिलते रहेंगे जिन्हे इसका असली सुपर वैक्सिन नही लगा है! यानी की चीनियों के अलावा बाकी पूरी दुनिया,
जी हां चीन ने सुपर वैक्सीन भी बनाया होगा। जो चीन ने गुप्त रूप से 2020 या शायद उससे भी पहले अपने लोगों को लगाया दिया होगा, ऐसे में ये भी सवाल उठता है की क्या उसने ऐसा वुहान प्रांत को छोड़ के किया? वुहान में जनता को जान बूझ के मरने के लिए छोड़ा गया? क्या वुहान में तानाशाही सरकार के विद्रोही बड़ी आबादी में रहते थे? शायद तभी तो उनके मरने से चीन को कोई खास फर्क नहीं पड़ा, आखिर दुनिया को ये भी तो दिखाना था उसे की उसके लोग भी मारे गए, (#एक तीर से दो निशाने?)
और अगर यह चीन का हथियार है, और इसी गति से म्यूटेंट हो हो कर तबाही मचाता रहा तो क्या यह 2030 तक दुनिया की 80% आबादी को नष्ट कर देगा?
लेकिन आखिर चीन ऐसा क्यों करेगा?
चीन की बड़ी आबादी, और कम होती जमीन चीनी सरकार के लिए चिंता का विषय जरूर होगी।
चीन सीमित भूमि और घटते संसाधनों पर कब्जा करने के लिए दुनिया की आबादी को समाप्त करने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है?
“मकसद बहुत स्पष्ट है”
चीन दुनिया के ज्यादा से ज्यादा आबादी को खत्म कर के पूरी दुनिया के खनिज संसाधन जैसे कि पेट्रोल, कोयला, मीठे पानी के भंडार और अपने लोगों के लिए खेती योग्य भूमि पर कब्जा करना चाहता है। क्योंकि बढ़ती आबादी और घटते संसाधनों की समस्या से निपटने का उसके पास ये एक आसान रास्ता था। और उसने यही किया (अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो वजह यही निकल के आयेगी)
अमेरिका का दावा चीन का जैविक हथियार है कोरोना? हाथ लगे सीक्रेट दस्तावेजों के आधार पर अमेरिकी विदेश विभाग को प्राप्त हुए खुफिया दस्तावेजों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है
द ऑस्ट्रेलियन ने इसपर एक लेख लिखते हुए बड़े दावे करते हुए लिखा
विशेष: चीनी सैन्य वैज्ञानिकों ने एक दस्तावेज में COVID-19 महामारी से पांच साल पहले 2015 में SARS को कोरोना वायरस हथियार बनाने पर चर्चा की, जिसमें यह भी कहा गया था कि तीसरा विश्व युद्ध बायोलॉजिकल हथियारों से की जाएगी
इस बारे में शर्री मार्कसन ने अपनी आने वाली किताब में भी बड़े खुलासे करने का वादा करते हुए ट्वीट कर लिखा
covud-19 की उत्पत्ति पर मेरी आने वाली खोजी किताब में रहस्योद्घाटन की कड़ियां हैं, जिसे हार्पर कॉलिंस द्वारा प्रकाशित किया जाना है।
वॉट रियली हैपेन्ड इन वुहान’
इसमें सार्स कोरोनावायरस को ‘नए युग का जैव हथियार’ बताया गया था ‘इसके साथ छेड़छाड़ कर मनुष्य को होने वाले वायरस संक्रमण के रूप में विकसित किया जा सकता है, इसके बाद इससे हथियार बनाया जा सकता है और इसका ऐसा इस्तेमाल किया जा सकता है जैसा आज तक नहीं हुआ है।’
जल्द ही छपने वाली किताब ‘वॉट रियली हैपेन्ड इन वुहान’ में इस शोध पत्र के बारे में जानकारी दी गई है। इस किताब के लेखक शारी मार्क्सन हैं और इसे हार्पर कॉलिन्स छाप रहा है, सितंबर तक इसके बाज़ार में आने की संभावना है।
लेखक शारी ने एक और ट्वीट में un दस्तावेजों का समर्थन भी किया जिसके अनुसार 2015 से ही चीन सार्स वायरस को विकराल रूप दे कर कोरोना वायरस के निर्माण को कोशिशों में लगा था।
चीनी वैज्ञानिकों ने सार्स कोरोना वायरस की चर्चा ‘जेनेटिक हथियार के नए युग’ के तौर पर की है, कोविड इसका एक उदाहरण है. PLA के दस्तावेजों में इस बात की चर्चा है कि एक जैविक हमले से शत्रु के स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त किया जा सकता है.
कोरोना वायरस पर चीन के दावों को स्वीकार करने को कोई तैयार नहीं है. हर ओर एक सवाल है कि जिस चीन में कोरोना वायरस पैदा हुआ है वो देश इसके असर से इतना सुरक्षित कैसे रहा? कैसे चीन में 6 से 8 महीने में जिंदगी पटरी पर आ गई, जबकि भारत समेत दुनिया के कई देश 2 साल से इस बीमारी से संघर्ष कर रहे हैं.
अब एक नई रिपोर्ट के खुलासे से कोरोना वायरस को लेकर चीन के इरादों पर शक और भी गहरा जाता है.
- ये रिपोर्ट 2015 के घटनाक्रम से जुड़ी है, जब दुनिया में कोरोना वायरस के घातक प्रभाव से लोग अनजान थे, लेकिन चीन उसी समय कोरोना वायरस को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के बारे में जांच कर रहा था.
- यही नहीं, आशंका है कि चीनी सैन्य वैज्ञानिकों ने तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियार से लड़े जाने की भविष्यवाणी की थी.
- ब्रिटेन के ‘द सन’ न्यूजपेपर ने ऑस्ट्रेलिया के समाचार पत्र ‘द ऑस्ट्रेलियन’ के हवाले से कहा है कि अमेरिकी विदेश विभाग को हाथ लगे इस ‘बॉम्बशेल’ यानी कि विस्फोटक जानकारी के अनुसार चीनी सेना PLA के कमांडर ये कुटिल पूर्वानुमान लगा रहे थे.
- अमेरिकी अधिकारी को मिले ये कथित दस्तावेज साल 2015 में सैन्य वैज्ञानिकों और चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए थे, जो कि खुद कोविड-19 के बारे में जांच कर रहे थे.
- चीनी वैज्ञानिकों ने सार्स कोरोना वायरस की चर्चा ‘जेनेटिक हथियार के नए युग’ के तौर पर की है, कोविड इसका एक उदाहरण है. PLA के दस्तावेजों में इस बात की चर्चा है कि एक जैविक हमले से शत्रु की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त किया जा सकता है.
- पीएलए के इस दस्तावेज में अमेरिकी वायुसेना के कर्नल माइकल जे के अध्ययन का भी जिक्र है जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि तृतीय विश्वयुद्ध जैविक हथियारों से लड़ा जाएगा.
- इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2003 में जिस SARS का चीन पर अटैक हुआ था वो हो सकता है कि एक जैविक हथियार हो जिसे आतंकियों ने तैयार किया हो.
- इन कथित दस्तावेजों में इस बात का उल्लेख है कि इस वायरस को कृ्त्रिम रूप से बदला जा सकता है और इसे मानवों में बीमारी पैदा करने वाले वायरस में बदला जा सकता है, इसके बाद इसका इस्तेमाल एक ऐसे हथियार के रूप में किया जा सकता है जिसे दुनिया ने पहली बार कभी नहीं देखा है.
- इस दस्तावेज में चीन के टॉप स्वास्थ्य अधिकारियों का लेख है. बता दें कि Covid-19 के पहले केस का पता साल 2019 में चला था. इसके बाद इस बीमारी ने वैश्विक महामारी की शक्ल ले ली है.
- इस खुलासे के बाद आस्ट्रेलियाई राजनेता जेम्स पेटरसन ने कहा कि इन दस्तावेजों ने कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में चीन की पारदर्शिता को लेकर संदेह और चिंता पैदा कर दी है. हालांकि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस लेख को प्रकाशित करने के लिए द आस्ट्रेलियन की आलोचना की है और इसे चीन की छवि खराब करने की मुहिम बताया है
चमगादड़ से नहीं फैल सकता वायरस
रिपोर्ट में इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि जब भी वायरस की जांच करने की बात आती है तो चीन पीछे हट जाता है। ऑस्ट्रेलियाई साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रॉबर्ट पॉटर ने कहा कि कोरोना वायरस किसी चमगादड़ के मार्केट से नहीं फैल सकता। यह कहानी पूरी गलत है। चीनी शोध पत्र के अध्ययन के बाद उन्होंने कहा कि वह रिसर्च पेपर बिल्कुल सही है।
चीन की जांच में रुचि क्यों नहीं?
जेनिंग्स ने यह भी कहा कि यह शोध यह भी स्पष्ट करता है कि चीन कोविड-19 की उत्पत्ति की बाहरी एजेंसियों से जांच में रुचि क्यों नहीं है। यदि यह किसी बाजार से फैलने का मामला होता तो चीन जांच में सहयोग करता।
चीन के वुहान में कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए गए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अब तक कोई ठोस रिपोर्ट पेश नहीं की है। पश्चिम देशों ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर डब्ल्यूएचओ के रवैए पर भी सवाल उठाए हैं
कोरोना वायरस कहां से आया और इसके किस तरह दुनिया में तबाही मचा दी- इन सवालों को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक परेशान हैं. चीन की लैब में कोरोना वायरस को विकसित किए जाने के तमाम दावों पर यूनाइटेड नेशंस की टीम भी कोई रिजल्ट नहीं दे पाई. इसी बीच वीकेंड ऑस्ट्रेलियन (Weekend Australian) ने अपनी एक रिपोर्ट में सनसनीखेज दावे करके दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच कोरोना वायरस को लेकर साल 2015 में ही चर्चा की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक इस बात के लिखित सबूत हैं कि चीनी वैज्ञानिकों (Chinese scientists) ने कोरोना वायरस को जैविक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर विचार-विमर्श किया था. ये दस्तावेज तब के हैं, जब दुनिया में सार्स महामारी पैदा भी नहीं हुई थी.
चीनी सेना के वैज्ञानिक सार्स कोरोना वायरस को जैविक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की बात कर रहे थे. उनके मुताबिक ये नए युग का जैविक हथियार होगा, जिसे कृत्रिम तरीके से नया रूप देकर इंसानों में उभरते जानलेवा वायरस में तब्दील किया जा सकता है. यानि चीन तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियारों के जरिये लड़ने की तैयारी पांच साल पहले से ही कर रहा था. इसके बाद कोविड-19 महामारी दिसंबर 2019 में अस्तित्व में आई थी.
चीन तीसरा विश्व युद्ध ‘कोरोना’ से लड़ना चाहता था !
ऑस्ट्रेलियन वीकेंड (Weekend Australian)की इस रिपोर्ट को news.com.au पर भी पब्लिश किया गया है. ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) के कार्यकारी निदेशक पीटर जेनिंग्स ने बताया है कि ये रिपोर्ट उस दावे के मामले में एक बड़ा लिंक हो सकती है, जिसे लेकर लंबे समय से आशंका जताई जा रही है. ये साफ तौर पर जाहिर करता है कि चीनी वैज्ञानिक कोरोना वायरस ( Coronavirus) के अलग-अलग स्ट्रेन को सैन्य हथियार के तौर इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे थे. उनका कहना है कि हो सकता है कि ये मिलिट्री वायरस गलती से बाहर आ गया, यही वजह है कि चीन किसी भी तरह की बाहरी जांच को लेकर असहयोग करता रहा है.




