रायपुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में नशे की बढ़ती लत और उसकी वजह से बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु ऐसी किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
उन्होंने DGP डीएम अवस्थी को पड़ोसी राज्यों से जुड़ी सीमाओं पर पुलिस चेकपोस्ट बनाने के निर्देश दिए थे। जिसमें कैमरा और पर्याप्त संख्या में सशस्त्र बल की तैनाती के लिए भी कहा गया था।
दरअसल मामला संज्ञान में तब आया था जब एक महीने पहले महासमुंद पुलिस ने एक ट्रक में गांजे की बड़ी खेप पकड़ी थी जिसमे बरामद माल की कीमत 2 करोड़ 20 लाख रुपए आंकी गई थी वो माल ओडिसा से कटहल से भरे ट्रक में छुपा कर लाया जा रहा था।
इसके अलावा तमाम सीमावर्ती राज्यों से छत्तीसगढ़ में नशे की खेप भारी मात्रा में खपाई जा रही है, एक अनुमान के मुताबिक छत्तीसगढ़ से अन्य राज्यों को भी गांजे की सप्लाई होती है जिसका कारोबार 7000 करोड़ रुपए सालाना है।
बहरहाल मुख्यमंत्री के आदेश के बाद राज्य की सीमा में कड़ाई कितनी हुई ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन फिलहाल रायपुर में अगर एक चक्कर लगा लिया जाए तो ऐसे कई जाने पहचाने अड्डे अभी भी सक्रिय हैं जहां से गांजे और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री और सेवन अभी भी जारी है। जिनमें प्रमुख है रिंग रोड नंबर 2 पर सर्विस रोड में बने खंडहर नुमा कुछ मकान (तस्वीरें देखें) टाटीबंध से लेकर भनपुरी चौक तक की इस भारी गहमागहमी वाली सड़क पर शाम होते ही नजारा बदल जाता है, और बड़ी आसानी से गांजे की बिक्री करते हुए दलालों को देखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री के सख्त आदेश के बाद एक बड़ा बदलाव जरूर आया है की अब गांजे की कीमत बढ़ गई है। और इसका सेवन करने वाले परेशान है की महंगाई की लिस्ट में अब गांजा भी शामिल हो गया।

