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कम इम्युनिटी वालों के लिए रिस्क बरकरार, टीके के बाद भी संक्रमण का खतरा

newsmrl.com Risk remains for those with low immunity, risk of infection even after vaccine update by rihan Ibrahim

कोरोना वायरस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को आसानी से अपना शिकार बना लेता है।

टीके की दोनों खुराक लगवाने के बावजूद ऐसे लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए इन लोगों को जोखिम से बचने के लिए मास्क पहनने के साथ ही शारीरिक दूरी के नियमों और दूसरे सुरक्षा उपायों का खास ध्यान रखना चाहिए। कई अध्ययनों से पता चलता है कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर टीका का असर कम रहता है। उनमें सामान्य इम्यून सिस्टम वाले लोगों की तुलना में एंटीबॉडी का स्तर कम पाया गया।

अंग प्रतिरोपण करा चुके लोगों के लिए अतिरिक्त खुराक:

एक अध्ययन में यह भी संकेत मिला है कि कोविड-19 रोधी टीके की अतिरिक्त खुराक देने से अंग प्रतिरोपण करा चुके मरीजों में ज्यादा एंटीबॉडी तैयार होती है। अंग प्रतिरोपण करा चुके 30 में से 24 मरीजों में टीके की दोनों खुराक के बावजूद कोई प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हुई थी लेकिन इनमें से आठ मरीजों को अतिरिक्त खुराक देने से उनमें वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी पैदा हुई। वहीं छह मरीज ऐसे थे जिनमें टीके की दो खुराक के बाद न्यूनतम एंटीबॉडी विकसित हुई थी, लेकिन जब उन्हें कोविड रोधी टीके की तीसरी खुराक दी गई तो उनकी प्रतिरोधक क्षमता बहुत बढ़ गई।

हाल ही में अंग प्रत्यारोपण कराने वाले 658 लोगों पर किए गए अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। वैक्सीन की दूसरी खुराक के बाद इनमें एंटीबॉडी की मौजूदगी का आकलन किया गया था। दावा है कि इन प्रतिभागियों में से कोई भी पूर्व में कोरोना संक्रमित नहीं पाया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन की दोनों डोज के बाद इन प्रतिभागियों में से इतनी मात्रा में भी एंटीबॉडी नहीं पाई गई, जिससे इसकी पहचान हो सके। केवल 54 फीसदी में टीके की दोनों खुराक लेने के बाद एंटीबॉडी मिला। इसी तरह गुर्दा प्रत्यारोपण कराने वाले 609 लोगों पर हुए अध्ययन में पाया गया कि टीकाकरण के बाद सिर्फ आधे लोगों में ही एंटीबॉडी थे। अध्ययन के मुताबिक, ल्यूकेमिया या लिम्फोमा वाले मरीजों में भी टीकाकरण के बाद खास एंटीबॉडी का उत्पादन नहीं हो पाता है।

अमेरिका में करीब 2.8 फीसदी कम प्रतिरोधक क्षमता वाले

मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता बेथ वालेस ने कहा कि अमेरिका में कम प्रतिरोधक क्षमता वालों की संख्या करीब 2.8 फीसदी (नौ मिलियन लोग) हैं, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दवाइयों का सहारा ले रहे हैं। चूंकि पहले जब कोविड-19 वैक्सीन को अधिकृत किया था। तब कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग अधर में फंस गए थे। वे यह पता लगाने की प्रतीक्षा कर रहे थे कि टीकाकरण उनकी रक्षा कर सकता है या नहीं। कड़े नियमों का पालन करें अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रमुख शोधकर्ता ब्रायन बोयार्स्की ने कहा, ‘अपने नतीजों के आधार पर हम यह सलाह देते हैं कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) की समस्या से जूझ रहे लोग कोरोना से बचाव के कड़े नियमों का पालन करें।

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