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संपादकीय – कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए क्या तैयारियां है?

newsmrl.com Editorial Blog #3 by Rihan Ibrahim

बेहतर होगा की सरकार की तैयारियों को बोनस मान के उसे अभी भूल जाएं। वैसे तो बहोत से दावे किए जा रहे, लेकिन दावा और हकीकत समय आने पर साफ होगा फिलहाल अपनी तैयारियों पर ध्यान देना सही होगा।

आइए जानते हैं की हम क्या तैयारी कर सकते हैं।

साफ है की वैक्सीनेशन अभी भारत में अपने बहुत ही प्रारंभिक स्तर पर है। तो एक विशाल जनसंख्या का इम्यून हुआ होना अभी पॉसिबल नही। ऐसे में हमे थोड़ा मतलबी बनने की जरूरत है, यानी की सिर्फ अपने बारे में सोचो,

  • मैं फलां फलां से क्यूं मिल रहा? क्या मिलना इतना जरूरी था?
  • मैं घर से बाहर क्यों हूं? क्या जिस वजह से मैं बाहर हूं, वो इतना जरूरी था?
  • शॉपिंग के लिए किसी 1 सदस्य का जाना काफी था तो ज्यादा लोग क्यूं गए?
  • मैं जो मास्क पहन रहा क्या वो n 95 है? अगर नही तो क्या मैने डबल मास्क पहना ?
  • क्या मेरा होटल में कैंटीन में या अन्य सार्वजनिक जगहों पर अपना मास्क उतार के खाना जरूरी था? या पार्सल करा के घर पे भी खा सकते थे?
  • क्या मैं अपनी घर की महिलाओं को शाम के वक्त मोहल्ला चुगली सभा में जाने से रोक सकता हु?
  • क्या मैं अपने घर के पुरुषों को यारी दोस्ती निभाने जाने से रोक रही हूं?
  • क्या इस शादी या धार्मिक या राजनीतिक भीड़ में घुसना इतना जरूरी था? क्या ये आयोजक मुझे वक्त पड़ने पर ऑक्सीजन और इलाज दिलाएंगे?

तो सबसे पहले इन मूलभूत सिद्धांत को अपने जीवन में उतारें उसके बाद सरकार की तैयारियों पे नज़र डालने से पहले याद रखें कि हम कोई सुपर पॉवर अमेरिका नही है, जो सरकार के पास मुफ्त में देने को भत्ता और राशन हो, जो मिल रहा वो बहुत है।

सरकार आपको जो दे रही, एक कमर टूटी हुई अर्थव्यवस्था वाले देश के हिसाब से बहोत है।

  • मुफ्त वैक्सीन मिल रहा
  • हर महीने राशन मिल रहा (चाहे थोड़ा ही सही)
  • मेडिकल तंत्र 1950 के मुकाबले तो अच्छा ही है।
  • इसके अलावा भी काफी कुछ मिलता ही है।

आप सरकार से और क्या चाहते हैं? अपने देश की आबादी को देखते हुए आप क्या उम्मीद रखते है? तो बेहतर होगा की खुद को और अपने परिवार को मतलबी बनाइए, लोगों के संपर्क मत रहिए, शाम 6 के बाद घर पे रहिए, परिवार के साथ रिश्ते मजबूत होंगे, आप खुद घर पे रहेंगे तो बच्चे भी घर पे रहेंगे, अपराध की संभावनाएं कितनी कम हो जाती है इस 6 बजे के बाद कर्फ्यू वाले नियम से। मेरा बस चले तो इस नियम को ताउम्र लागू रखूं।

शाम को चौपाटी ना खुले अच्छा है, उसका टाइम अभी 12 से 06 है तो ठीक तो है, क्या बुरा है, लोगों को आदत हो जायेगी धीरे धीरे।

तो सरकार जो कर रही ठीक कर रही, अगर हम सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर लें, तो lockdown और इलाज की जरूरत ही ना पड़े।

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