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खतरनाक होता जा रहा कोरोना, मरीजों में दिखने लगे हैं गैंगरीन, बहरापन जैसे लक्षण

newsmrl.com Corona becoming dangerous, symptoms like gangrene, deafness have started appearing in patients update by rihan Ibrahim

बहरापन गंभीर उदरसंबंधी रोग, खून के थक्के जमकर उसका गैंगरीन में बदलना, जैसे लक्षण सामान्यतौर पर कोविड मरीजों में नहीं देखे गए थे.

अब डॉक्टर भारत में इन बीमारियों को कथित डेल्टा वैरियंट से जोड़ कर देख रहे हैं. इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में शुरुआती साक्ष्यों से पता चलता हैं कि इस प्रभावशाली स्ट्रेन की वजह से अस्पताल जाने का खतरा ज्यादा बना रहता है.

डेल्टा जिसे B.1.617.2 के नाम से भी जाना जाता है, इसने पिछले छह महीने में करीब 60 देशों में अपना आतंक फैलाया था. और ऑस्ट्रेलिया से लेकर यू.एस.ए तक संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पर रोक लगाई गई. इसी डेल्टा वेरियेंट की वजह से यू.के सरकार को पिछले महीने अनलॉक की प्रक्रिया को शुरू करने पर दोबारा विचार के लिए मजबूर कर दिया था. इस वेरियंट में दूसरे वेरियंट की तुलना में संक्रमण की तीव्रता, वैक्सीन के असर को कम करना, जैसी तमाम वजहों से समझ में आ रहा है कि इस स्ट्रेन का असर किस हद तक गंभीर हो सकता है.

एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, चैन्नई के अपोलो अस्पताल के संक्रमण बीमारियों के फिजिशियन डॉ अब्दुल गफूर का कहना है कि B.1.617 का नई लक्षणों से संबंध है या नहीं ये पता करने के लिए हमें और वैज्ञानिक शोध की ज़रूरत है. गफूर का कहना है कि महामारी की शुरूआती लहर की अपेक्षा इस बार ज्यादा डायरिया के मरीज देखने को मिल रहे हैं.

पिछले साल तक हमें लग रहा था कि हम वायरस के बारे में जान गए हैं, लेकिन इस बार फिर इसने अपने नए रूप से सभी को चौंका दिया है. इस बार पेट में दर्द, उबकाई, उल्टी, भूख में कमी, बहरापन, जोड़ो में दर्द जैसे कई लक्षण कोविड-19 के मरीजों में देखने को मिल रहे हैं. बीटा और गामा वैरियंट सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में पाए गए थे. यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के शोधार्थियों ने पिछले महीने एक शोध की जिसके मुताबिक उस दौरान इस में बहुत कम या ना के बराबर लक्षण देखने को मिले थे.

यही नहीं डॉक्टर का कहना है कि इस बार कुछ मरीजों में माइक्रो थ्रोंबी और छोटे खून के थक्के देखने को मिल रहे हैं. यही आगे चलकर गैंगरीन में तब्दील हो जाता है.

परेशानी का सबब बनते खून के थक्के

भारत में पिछले साल के 1करोड़ 3 लाख के मुकाबले 2021 में कोविड-19 के अब तक 1 करोड़ 86 लाख मामले दर्ज किए गए. भारत सरकार की एक पैनल के हाल ही में हुए अध्ययन के मुताबिक भारत में दूसरी लहर के घातक होने के पीछे डेल्टा वैरियंट था, ये स्ट्रेन यूके में पहली बार पाई गई अल्फा स्ट्रेन के मुकाबले में 50 फीसद ज्यादा संक्रामक थी.

इस लहर में कोविड-19 में जो लक्षण और पेचीदगी देखने को मिली वो बहुत ज्यादा थी, यहां तक कि खून के थक्के जमने की दिक्कते जिन मरीजों में देखने को मिली उनमें पहले इस तरह के कोई लक्षण नहीं थे. इसके पीछे नए वायरस वैरियंट को ही माना जा रहा है. डॉक्टर अब ये पता लगाने में लगे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है कि कुछ मरीजों में ये लक्षण देखने को मिल रहे हैं जबकि कुछ में ऐसा कुछ नज़र नहीं आ रहा है.

यही नहीं डॉक्टर को कुछ मामलों में ये भी देखने को मिला है कि उन नसों में खून के थक्के जमे जो आंत तक खून पहुंचाती है, इस वजह से कई मरीजों को पेट दर्द की शिकायत भी हो रही है. दिलचस्प बात ये है कि दूसरी लहर में हर मरीज में अलग लक्षण देखने को मिल रहे हैं.

डेल्टा वैरियंट ने भारत में अपना भयानक रूप दिखाना शुरू कर दिया है. वर्तमान में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात इसका तेजी से फैलना है और इसका बच्चों पर भी असर देखने को मिल रहा है. इस बार पूरे परिवार में कोविड के लक्षण देखने को मिले जबकि पिछली बार ऐसा देखने को कम मिल रहा था. यही नहीं इस बार कोविड की वजह से पनपी म्यूकरमायकोसिस ने भी भारत को एक नए सिर दर्द दिया है.

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