कोरोना की दूसरी लहर अपने साथ नई परेशानियां और चुनौतियां लेकर आई है।
इस महामारी ने अपने दूसरे अटैक में लाखों लोगों की जान ली और अब लोगों को कोरोना की तीसरी लहर की चिंता सता रही है। कोरोना की तीसरी लहर ने बच्चों को लेकर चिंता ज्यादा बढ़ा दी है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगला अटैक बच्चों पर होगा।
वहीं कोरोना से ठीक हुए मरीजों में अब ब्लैक फंगस इंफेक्शन के मामले सामने आए हैं और कोरोना की तीसरी लहरे के बच्चों को अपनी चपेट में लेने के बाद ब्लैक फंगस के डर से पेरेंट्स के होश ही उड़ गए हैं।
आगे हम आपको बता रहे हैं कि ब्लैक फंगस क्या है और बच्चों में इसके लक्षण क्या हैं।
ब्लैक फंगस एक तरह का गंभीर फंगल इंफेक्शन है जो कि म्यूकोरमाइसेट्स नामक फफूंदी जमने से होता है। आमतौर पर यह हवा, मिट्टी या कीड़े लगे कार्बनिक पदार्थ में होता है। यह साइनस, ब्रेन या फेफड़ों को संक्रमित करता है। इसलिए यह फंगस कोरोना मरीजों और रिकवर हो चुके लोगों में देखा जा रहा है।
यदि किसी व्यक्ति को कोरोना होने से पहले ही कोई बीमारी है या वो पर्यावरण में मौजूद खतरनाक पैथोजींस से लड़ने के लिए कोई इम्यूनो सप्रेसेंट दवा ले रहा है, तो उसमें फंगल इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा है।
ब्लैक फंगस से संक्रमित होने पर, उसके लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है वरना कोई मुश्किल आ सकती है। इसके लक्षण हैं माथे पर सूजन और सिरदर्द, चेहरे के एक तरफ सूजन, नाक के आसपास कालापन, आंखों से धुंधला दिखाई देना, छाती में दर्द, खांसी या सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां शामिल हैं।
दुर्लभ ही है लेकिन फिर भी पेरेंट्स को अपनी तैयारी कर लेनी चाहिए। चूंकि, कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है इसलिए आपको सुरक्षित रहने के उपाय कर लेने चाहिए। बच्चों को इस महामारी के बारे में बताने के साथ-साथ, उसे जरूरी सावधानियां अपनाना भी सिखाएं।
कोई भी बाहर से घर पर आए या ज्यादा लोगों के बीच बच्चे को मास्क पहनाकर रखें। आंख, नाक और मुंह को छूने से पहले हाथ धोने की सलाह दें।




