आयुष्मान भारत-PMJAY क्या है?
आयुष्मान कार्ड मतलब मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत का कार्ड. आयुष्मान भारत योजना के दो हिस्से हैं, एक है उनकी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम जिसे आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत-PMJAY) और दूसरी है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर योजना.
आयुष्मान भारत-PMJAY देश की ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है- ऐसा केंद्र सरकार का हमेशा से दावा रहा है.
गाँवों में कोरोना और आयुष्मान का लाभ
कोरोना महामारी की दूसरी लहर अब गाँवों की ओर बढ़ रही है, ऐसा आँकड़े बता रहे हैं और अब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह रहे हैं.
और गाँवों में ही बसते हैं इस योजना के ज़्यादातर कार्ड धारक भी.
मार्च की शुरुआत में जब दूसरी लहर का प्रकोप बढ़ रहा था, तब 38 फ़ीसदी नए मामले ऐसे ज़िलों में दर्ज किए जा रहे थे जहाँ 60 फ़ीसदी से अधिक आबादी ग्रामीण इलाक़ों में रहती है. लेकिन अप्रैल के अंत तक ये आंकड़ा बढ़ कर 48 फ़ीसदी तक हो चुका था.
अब तक इस योजना के तहत तकरीबन 15 करोड़ 88 लाख कार्ड बन चुके हैं, जिनमें ज़्यादातर लोग ग्रामीण इलाकों में रहते है.
- सितंबर, 2018 में इस योजना को रांची में लॉन्च किया गया था. लेकिन उससे पहले अगस्त में ही ट्रायल के दौरान हरियाणा के करनाल में इस योजना के तहत पैदा हुई बच्ची ‘करिश्मा’ को इस योजना का पहली लाभार्थी माना जाता है.
- इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों के हर सदस्य का आयुष्मान कार्ड बनता है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ़्त होता है. माना जाता है कि देश की कुल आबादी के आर्थिक रूप से कमज़ोर निचले 40 फ़ीसदी लोगों के लिए ये योजना है. इसके तहत देश भर में 20 हजार से ज़्यादा अस्पतालों में 1000 से ज़्यादा बीमारियों का इलाज मुफ़्त में करवाया जा सकता है.
- इस योजना के लाभार्थी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर तय किए जाते हैं, जिसके लिए 2011 में हुई सामाजिक और आर्थिक जनगणना के मानक बनाया गया है.
- साल 2020 के शुरुआती महीनों में कोरोना महामारी भारत में पैर पसार रही थी, तब केंद्र सरकार ने कोविड-19 के मरीज़ों का इलाज भी आयुष्मान योजना के तहत करवाने की घोषणा की थी.
- लेकिन देश में कोरोना महामारी के दौर में योजना का लाभ कार्ड धारकों को कितना मिल रहा है, उसकी जीती जागती मिसाल हैं सीकर के सुभाष चंद.
देश के हर कोने से कोरोना का इलाज करवाने के लिए मकान, जमीन और गहने बेचने की ना जाने कितने ही कहानियाँ सुनने में आ रही हैं, लेकिन जिनके पास बेचने के लिए कुछ नहीं है, उनके लिए ये कार्ड कितना उपयोगी होगा, इसका बखान करते केंद्र सरकार थकती नहीं थी.
पिछले साल मई में इस योजना का बढ़-चढ़ कर बखान करते हुए इसके तहत एक करोड़ लोगों का मुफ़्त इलाज करवाने की उपलब्धि का जश्न भी मनाया गया.
- लेकिन बात जब कोरोना महामारी की चपेट में आए लोगों के इलाज की आई, तो आयुष्मान भारत-PMJAY का रिपोर्ट कार्ड वैसा नहीं दिखता जैसे दावे किए गए थे.
- राजस्थान में आयुष्मान योजना का हाल
सबसे पहले बात राजस्थान की. सुभाष चंद की कहानी सुनने के बाद बीबीसी ने सम्पर्क किया राजस्थान की स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणा राजोरिया से. - उन्होंने बताया कि राजस्थान में आयुष्मान भारत-PMJAY का नाम 1 मई से ‘मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना’ हो गया है. उससे पहले इस योजना का नाम ‘आयुष्मान भारत-महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना’ था.
- नाम बदलने के साथ-साथ इस योजना के लिए पात्रता का दायरा भी बढ़ा दिया गया है, जिसके तहत अब इस योजना का लाभ राज्य के 1.35 करोड़ लोगों को दिया जा रहा है. इसलिए केवल आयुष्मान भारत-PMJAY के लाभार्थियों की अलग लिस्ट नहीं रखते.
- अरुणा राजोरिया का दावा है कि राजस्थान में आयुष्मान भारत-PMJAY के लाभार्थियों का ‘मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना’ के तहत इलाज किया जा रहा है.
सुभाष चंद के मामले में उन्होंने कहा कि अगर वो कोरोना का इलाज इस योजना के पैनल में शामिल अस्पतालों में करवाते तो उन्हें भी मुफ़्त इलाज मिलता. लेकिन सुभाष चंद के भाई की दलील है कि उनको आयुष्मान भारत के पैनल में शामिल अस्पतालों के बारे में जानकारी नहीं है और ना ही उनके पास ऐसे अस्पतालों की कोई लिस्ट है.
इसके जवाब में राजोरिया ने बताया कि आयुष्मान भारत-PMJAY योजना के हर लाभार्थी के फ़ोन पर मैसेज के जरिए पैनल में शामिल अस्पतालों की लिस्ट का लिंक भेजा गया था.
ये मुमकिन है कि सुभाष चंद को ऐसा कोई मैसेज मिला हो और वो मैसेज के लिंक को खोलकर देख ये ना पाए हों कि किन निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत-PMJAY के तहत उनका इलाज हो पाएगा.
प्राइवेट अस्पतालों की लूट और आयुष्मान भारत-PMJAY का रेट कार्ड
आयुष्मान भारत-PMJAY का ये रिपोर्ट कार्ड अच्छा है या बुरा, ये समझने के लिए हमने कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स से बात की. जिनमें एक हैं ऊमेन सी. कुरियन, जो ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के साथ सीनियर फ़ेलो के तौर पर जुड़े हैं.
ऊमेन सी. कुरियन ने बीबीसी से कहा, “जब देश में रोजाना कोविड-19 के औसतन 20-25 हजार नए मामले आ रहे हों, तब साल भर में सरकारी स्कीम के तहत केवल 4 लाख मरीज़ों का इलाज, इतनी बड़ी हेल्थ स्कीम के लिए अच्छा कैसे माना जा सकता है?”
ग़ौरतलब है कि इस साल मार्च-अप्रैल से शुरू हुई दूसरी लहर में तो भारत में एक दिन में 4 लाख नए मामले तक आए हैं.
“इस सरकार की दिक़्क़त यही है कि ये डेटा साझा नहीं करती. अब ये 4 लाख मरीज, किस हाल में थे, किस राज्य में कितने थे, ये बताने में भी इन्हें दिक़्क़त है, तो फिर समझा जा सकता है कि ये क्या छुपाना चाह रहे हैं.”
पिछले साल दिसंबर 2020 तक के आँकड़े कुछ हद तक पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म पर हैं, उनसे कुछ संदर्भ निकाले जा सकते हैं. ये आँकड़े बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान इस योजना के तहत इलाज माँगने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, लेकिन सबको अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पाया.
ऊमेन मानते हैं कि इसके पीछे एक बड़ी वजह कोविड19 के इलाज के लिए आयुष्मान भारत-PMJAY का रेट कार्ड भी है.
आयुष्मान भारत-PMJAY के तहत हरियाणा का रेट कार्ड कुछ इस प्रकार है:
• आईसीयू बेड (वेंटिलेटर के साथ) 5000 रु प्रति दिन
• आईसीयू बेड – 4000 रु प्रति दिन
• हाई डेंसिटी यूनिट बेड – 3000 रु. प्रति दिन
• जनरल वार्ड बेड – 2000 रु. प्रति दिन
चूंकि कोविड-19 के इलाज में पीपीई किट की ज़रूरत भी पड़ती है, इस वजह से हरियाणा सरकार ने इस पर 20 फ़ीसद रेट बढ़ाने का फैसला किया था. जिसके बाद आईसीयू बेड, वेंटिलेटर के साथ 6000 रु. प्रति दिन का पड़ेगा.
हालांकि इतना करने के बाद भी हरियाणा का रिपोर्ट कार्ड कहता है कि वहाँ पिछले एक साल में सिर्फ़ 10 हजार लोगों का इस योजना के तहत इलाज हुआ, लेकिन वहां के आयुष्मान भारत कार्ड धारकों की संख्या 15.5 लाख है और वहाँ कोरोना के मरीज साढ़े 6 लाख से ज़्यादा है. साथ ही हरियाणा में कोरोना के इलाज की सुविधा 600 से ज्यादा अस्पतालों में है.
कमोबेश हरियाणा सरकार जैसे रेट कार्ड ज़्यादातर राज्यों का भी है.
ऐसे में सवाल उठता है कि सुभाष चंद जैसे क्रिटिकल मरीज़ों को प्राइवेट अस्पताल वाले आयुष्मान योजना के तहत सिर्फ़ 6000 रुपये रोज़ाना के लिए क्यों भर्ती करेंगे? वो भी तब कोरोना महामारी के बीच उस आईसीयू बेड के एवज में प्राइवेट अस्पताल वाले बड़े आराम से मोटी रकम वसूल सकते हैं.
ऊमेन के मुताबिक़ ये एक बड़ी वजह है जिसके चलते कोविड-19 जैसे क्राइसिस में इस योजना के तहत ज़्यादा लोगों को मुफ़्त इलाज का फ़ायदा नहीं मिल पाया. कोरोना महामारी को प्राइवेट अस्पतालों ने पैसा बनाने का एक ज़रिया बना लिया है.


