तीन अप्रैल को हुई मुठभेड़ में नक्सलियों ने कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को बंधक बना लिया था.
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तीन अप्रैल को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना के 22 जवानों की जान चली गई थी. इसके अलावा 31 जवान घायल हुए थे, जबकि कई नक्सली भी मारे गए थे.
नक्सलियों ने कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को बंधक बना लिया था. जैसे ही राकेश्वर के बंधक बनाए जाने की ख़बर बाहर आई,
सोशल मीडिया पर राजेश्वर सिंह की छोटी बेटी का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वो अपनी चाचा की गोद में बैठ हुए बार-बार एक ही सवाल कर रही थी कि पापा कब आएंगे? अंतत: 6 दिनों बाद नक्सलियों ने आठ अप्रैल उन्हें रिहा कर दिया. सीआरपीएफ ने भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है.
रिहाई से पहले नक्सलियों ने कमांडो को 12 गांवों में घुमाया और अंततः एक जगह पर गांव वालों की मौजूदगी में 12 गांव के लोगों से हामी भरवाने के बाद उसे रिहा किया गया
राकेश्वर सिंह की रिहाई का मुख्य श्रेय सरकार और नक्सलियों के बीच मध्यस्थता करने वाली टीम को दिया जा रहा है, जिसमें पद्मश्री धर्मपाल सैनी, और गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बोरैया जैसे लोग शामिल थे.
बताया जा रहा है कि मध्यस्थता करने वाले लोगों ने नक्सलियों को इस बात के लिए राजी किया कि वो राजेश्वर को सही सलामत छोड़ दें.
नक्सलियों ने 7 अप्रैल को एक संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने बीहड़ जंगलों में मध्यस्थता का बुलावा भेजा था. इस संदेश के बाद सरकार ने मध्यस्थता के लिए एक टीम का गठन किया था. कुल 11 लोग इस टीम का हिस्सा बनाए गए थे. इस तरह राकेश्वर अब सही सलामत घर लौट चुके हैं.
video and news source ANI
