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असम चुनावः पीएम मोदी से हुई बड़ी चूक, 200 साल पहले मरे लचित को बताया स्वाधीनता सेनानी

newsmrl.com assam update by akanksha tiwari

200 साल पहले मरे लचित बरफुकन को बताया स्वाधीनता सेनानी

।स्वतंत्रता के 75 साल से जुड़े एक कार्यक्रम में पीएम ने कहा था कि बरफुकन ने भारत की स्वाधीनता में योगदान दिया है, इसे लेकर विपक्षी कांग्रेस और असम जातीय परिषद ने मोदी पर जमकर निशाना साधा था।

असम के विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा नेता एक अहोम योद्धा का नाम लगातार प्रचार अभियान में इस्तेमाल करते रहे हैं। यह नाम है 1671 में सराईघाट की लड़ाई में मुगलों को हराने वाले अहोम सेनापति लचित बरफुकन का। आलम यह है कि पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक कई बार बरफुकन का जिक्र कर चुके हैं। इतना ही नहीं बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबरॉय ने तो असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के एक कार्यक्रम में बरफुकन पर बायोपिक बनाने तक का ऐलान कर दिया है।

हाल ही में बरफुकन के नाम पर पहली बार विवाद तब उभरा, जब कांग्रेस और असम जातीय परिषद ने पीएम नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने बरफुकन को एक कार्यक्रम में गलत तरह से स्वतंत्रता सेनानी बता दिया। दरअसल, स्वतंत्रता के 75 साल से जुड़े एक कार्यक्रम में पीएम ने 12 मार्च को कहा था कि बरफुकन ने भारत की स्वाधीनता में योगदान दिया है।

जबकि सच्चाई यह है कि बरफुकन स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू होने से 200 साल पहले ही मर चुके थे।ऐसे में यह जानना काफी जरूरी है कि लचित बरफुकन कौन थे। जानकारों की मानें तो बरफुकन असम के सबसे बड़े सैन्य नायक कहे जाते हैं। वे 13वीं सदी के दौर में अहोम वंश के योद्धा थे। उन्हें ब्रह्मपुत्र के किनारे सराईघाट का युद्ध लड़ने के लिए जाना जाता है।

यहां उन्होंने मुगलों को हराया था। डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर जहनाबी गोगोई के मुताबिक, बरफुकन एक मजबूत कमांडर थे, जिनकी हिम्मत की काफी तारीफ़ होती है, क्योंकि मुगलों से युद्ध के दौरान वे काफी बीमार हो गए थे।

2017 में असम सीएम सर्वानंद सोनोवाल ने ऐलान किया था कि लचित दिवस पूरे देश में मनाया जाएगा। एक अन्य प्रोफेसर ने कहा, “अब असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के सभी बड़े नेता असमी लोगों को बरफुकन की याद एक हिंदू योद्धा के तौर पर दिलाते हैं। अपनी शब्दावली में वे मुगलों को मुस्लिमों के समान करार देते हैं। यह भाजपा के हिंदुत्व विचारधारा में फिट बैठता है। लेकिन इसमें एक बात यह है कि बाग हजारिका (इस्लामइल सिद्दीकी) जैसे नौसैनिक योद्धा भी अहोम सेना का हिस्सा रहे थे।

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