केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 17 मार्च 2021 को कहा कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश वे तीन राज्य हैं, जहां कोविड-19 टीको का अपव्यय सबसे ज्यादा है.
कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ भारत में जहां विश्व के सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, वहीं यहां पर कोरोना टीका की खुराक की सबसे अधिक बर्बादी भी हो रही है.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि भारत में कोरोना टीके की औसतन 6.5 प्रतिशत खुराक बर्बाद हो रही है. देश के सबसे शिक्षित प्रदेशों में शुमार आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में टीके की सबसे अधिक खुराक बर्बाद हो रही है. तेलंगाना में 17.6 प्रतिशत खुराक बर्बाद हो रही है, तो वहीं आंध्र प्रदेश में कोरोना के टीके की करीब 11.6 प्रतिशत बर्बादी हो रही है.
कोरोना टीके की बर्बादी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को इसका किफायती तरीके से इस्तेमाल की चेतावनी भी दी है. स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के अनुसार, अब तक देश में टीके की 3.51 करोड़ खुराक दी गई है.
इनमें से 1.38 करोड़ खुराक 45 से 60 साल की उम्र के बीच गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को दी गई है. उन्होंने बताया कि 15 मार्च को दुनिया में कोरोना की 83.4 लाख खुराक दी गई, जिनमें से 36 प्रतिशत खुराक अकेले भारत में दी गई.
स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि पांच राज्यों (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर) में टीके की खुराक की बर्बादी राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है. उन्होंने कहा कि राज्यों को संदेश दिया गया है कि कोरोना के टीके अनमोल हैं. ये लोगों की सेहत की बेहतरी के लिए है और इसलिए किफायती तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए. टीके की बर्बादी को बड़े पैमाने पर कम करने की जरूरत है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सरकार ने सभी राज्यों में अब तक कोविड-19 टीकों की 7.5 करोड़ खुराकें उपलब्ध कराई हैं. कुछ राज्य जो अपने टीके की आपूर्ति के प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं, जिनमें 2 प्रतिशत से भी कम खुराक व्यर्थ हो रही हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विशेष तौर पर 12 राज्यों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए मास्क पहने, सामाजिक दूरी, हाथ साफ करने और भीड़भाड़ पर नियंत्रण के नियम को सख्ती से लागू कराने की सलाह दी गई है. केंद्र ने राज्यों को अधिक मौतों वालों जिलों में चिकित्सा प्रबंधन सुनिश्चित करने और जांच, पहचान और इलाज की रणनीत को लागू करने की सलाह दी है.
