बॉलिवुड ऐक्ट्रेस तापसी पन्नू और डायरेक्टर अनुराग कश्यप पर हुई आईटी रेड के मुद्दे पर शिवसेना ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ संपादकीय में लिखा है कि केंद्र सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं है।
शिवसेना ने सवाल पूछते हुए तंज कसा कि मोदी सरकार के खिलाफ बोलनेवाले कलाकार और सिने जगत के निर्माता-निर्देशकों पर ‘इन्कम टैक्स’ के छापे पड़ने लगे हैं। इनमें तापसी पन्नू, अनुराग कश्यप, विकास बहल और वितरक मधु मंटेना का नाम प्रमुख हैं। तापसी पन्नू और अनुराग कश्यप खुलकर अपने विचार व्यक्त करते रहते हैं। क्या इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया है?
‘सामना’ ने लिखा है कि हिंदी सिने जगत का व्यवहार और काम-धाम स्वच्छ और पारदर्शी है, अपवाद केवल तापसी और अनुराग कश्यप का है। सिने जगत की कई महान उत्सव मूर्तियों ने किसान आंदोलन के संदर्भ में विचित्र भूमिका अपनाई।
उन्होंने किसानों को समर्थन तो नहीं दिया, उल्टे दुनिया भर से जो लोग किसानों को समर्थन दे रहे थे उनके बारे में इन उत्सव मूर्तियों ने कहा कि ये हमारे देश में दखलंदाजी है। लेकिन तापसी और अनुराग कश्यप जैसे गिने-चुने लोग किसान आंदोलन के पक्ष में खड़े रहे। उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

