प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 100 के करीब पहुंच रही है।
अस्पतालों में 92 मरीजों का इलाज चल रहा है। ऐसे में कोरोना से स्वस्थ्य होने वाले ब्लैक फंगस को लेकर काफी डरे हुए हैं। ब्लैक फंगस के सर्वाधिक 69 मरीज एम्स में भर्ती हैं। इनमें से 19 मरीजों का ऑपरेशन हो चुका है। धीरे धीरे मरीज रिकवर कर रहे हैं। ब्लैक फंगस को लेकर तमाम तरह के सवालों का जवाब एम्स रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर ने दिया।
ज्यादा मात्रा में स्टेरायड के इस्तेमाल से भी खतरा बढ़ा
ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस को लेकर पहली बात ये कि कोरोना के सभी मरीजों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसे पेशेंट जिनकी डायबिटीज कंट्रोल में नहीं रहती है। उनको इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा है। ब्लैक फंगस बीमारी की अहम वजहों में अनकंट्रोल यानी अनियंत्रित डायबिटीज और अत्यधिक मात्रा में स्टेरायड का इस्तेमाल इसके पीछे एक अहम वजह हो सकता है। चूंकि कोरोना के इलाज में स्टेराइड का इस्तेमाल होता है, इसलिए अभी कोरोना के मरीजों में ये ज्यादा देखा जा रहा है। इसके अलावा ऐसे लोग जिनका अंग प्रत्यारोपण यानी ट्रांसप्लांट हुआ है और उन्हें इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं दी जा रही है,
उनमें इसका खतरा बना रहता है। इसके अलावा कुछ दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में भी ये हो सकता है। ब्लैक फंगस का इलाज तीन स्तरों पर किया जाता है। इसे आप ब्लैक फंगस की एबीसी भी कह सकते हैं। ए यानी सबसे पहले हम ब्लैक फंगस के शिकार मरीज की अनियंत्रित डायबिटीज को कंट्रोल करते हैं। डायबिटीज को कंट्रोल करने के साथ दूसरा स्तर में हम इंजेक्शन एंफोटेरेसिन-बी के जरिए मरीज के शरीर के हिस्से में आए इंफेक्शन को दूर करने की कोशिश करते हैं। ये इंजेक्शन इलाज का अहम हिस्सा है। तीसरे स्तर पर मरीज की स्थिति अगर इनसे कंट्रोल नहीं होती तो जिस हिस्से में संक्रमण का फैलाव है उस हिस्से का ऑपरेशन किया जाता है।
इसलिए भी मरीज को स्वस्थ होने में थोड़ा लंबा वक्त यानी करीब 4 हफ्ते लग जाते हैं। आमतौर पर ब्लैक फंगस नाक के जरिए शरीर के हिस्सों जैसे आंख, दिमाग, जबड़े आदि को नुकसान पहुंचा सकता है। ब्लैक फंगस के इंफेक्शन के कारण शरीर का जो हिस्सा ज्यादा डैमेज हो रहा होता है उसका ऑपरेशन करना जरूरी हो जाता है। सामान्य तौर पर आप इसे इस तरह समझ सकते हैं कि शरीर के संक्रमण से प्रभावित हिस्से की सर्जरी के जरिए इंफेक्शन के फैलाव को रोक दिया जाता है। बचाव के लिए बहुत जरूरी है कि मरीज अपनी डायबिटीज को कंट्रोल में रखे डायबिटीज कंट्रोल में रहने से शरीर के भीतर इसके फैलाव का जोखिम कम हो जाता है।
आंख या नाक में दर्द और आंखों के चारों ओर लालिमा
नाक का बंद होना, नाक से काला या लाल रंग का तरल बहना
सांस की तकलीफ खून की उल्टी या मानसिक स्थिति में बदलाव
चेहरे में एक तरफ सूजन
जबड़े की हड्डी में दर्द
नाक या तालू का काले रंग का होना
दांत में दर्द या दांतों का ढीला होना
धुंधला दिखाई देना
बदन दर्द, त्वचा में चकते आना
छाती में दर्द बुखार आना
