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एंटीलिया मामले में रीक्रिएट कराई जाएगी क्राइम सीन,शिवसेना ने ली चुटकी।

newsmrl.com crime update by rihan_ibrahim

NIA अब सचिन वझे को पीपीई किट पहनाकर क्राइम सीन रीक्रीएट करेगी।


पांच स्वतंत्र गवाहों के सामने क्राइम सीन दुबारा रीक्रीएट किया जाएगा। 25 फरवरी को PPE किट पहने एक शख्स का CCTV वीडियो सामने आया था, इसमें वह शख्स स्कॉर्पियो के पास से गुजरता हुआ नजर आ रहा था। NIA को संदेह है कि यह वही शख्स है, जिसने स्कॉर्पियो को अंबानी के घर के बाहर खड़ा किया था।

सचिन वझे की टीम के अन्य सदस्यों से पूछताछ जारी
सचिन वझे के साथ काम करने वाले CIU के कुछ अधिकारी और कांस्टेबल को दूसरी बार NIA ने सोमवार को पूछताछ के लिए बुलाया है। कुछ देर पहले वे NIA ऑफिस पहुंचे हैं। API रियाज काजी सीआईयू में सचिन वाझे के साथ काम करते थे उनसे फिर से पूछताछ हो रही है। इन सभी से NIA के एक SP पूछताछ कर रहे हैं।

NIA सूत्रों के मुताबिक इनोवा और स्कॉर्पियो के ड्राइवर का पता चल गया है। दोनों से पूछताछ जारी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी दिखाई जा सकती है। जांच में सामने आया है कि दोनों सचिन वझे के करीबी थे।

NIA की टीम सचिन वझे के ठाणे स्थित घर पर भी पूछताछ के लिए पहुंची थी और वहां से 2 मार्च से लेकर अब तक के CCTV फुटेज जब्त किए गए हैं। सोसाइटी के मेंबर्स से भी पूछताछ हुई है। सचिन वझे का परिवार फिलहाल घर पर नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक- NIA की जांच में सामने आया है कि वझे कई साल से नौकरी में नहीं रहने के बावजूद कई करोड़ की संपत्ति के मालिक थे। उनकी पत्नी के नाम पर भी करोड़ो की प्रॉपर्टी होने का पता चला है। NIA जांच की रडार पर कुछ राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हैं।

मुंबई पुलिस के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है। साथ ही कहा है कि NIA ने सिर्फ शक के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसमें नियमों का पालन नहीं किया। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में सुनवाई कब होगी।

सचिन के बहाने शिवसेना का केंद्र पर निशाना
इस बीच शिवसेना ने सचिन वझे की गिरफ्तारी के बहाने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र सामना में शिवसेना ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे बदले की कार्रवाई करार दिया है।

सामना में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार ने वझे का ट्रांसफर करके पूरे मामले की जांच राज्य की एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) को सौंपी थी। यह जांच चल ही रही थी कि केंद्र ने NIA को जांच के लिए भेज दिया। इतनी जल्दी इसकी जरूरत नहीं थी। महाराष्ट्र के किसी मामले में टांग अड़ाने का मौका मिले तो केंद्र की जांच एजेंसियां भला पीछे क्यों रहें?

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