पूरे प्रदेश से सैकड़ों की संख्या में नर्सिंग छात्र इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने जा रहे छात्रों को पुलिस ने बूढ़ातालाब के पास ही रोक लिया
संचालक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा परीक्षा आयोजित न करने से उनके भविष्य अंधकार में होने सेवा और रोजी-रोटी, जीवन की प्रगति बाधित होने की आशंका है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में बीएससी नर्सिंग स्टाफ की लगातार दो वर्षों से परीक्षा नहीं हो पा रही है। कोराना काल की वजह से बार-बार लग रहे लॉकडाउन की वजह से उनकी परीक्षाएं नहीं हुई हैं। इससे इन विद्यार्थियों का भविष्य अब अंधकार में नजर आने लगा है। स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद भी संचालक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा परीक्षा आयोजित न करने से उनके भविष्य अंधकार में होने सेवा और रोजी-रोटी, जीवन की प्रगति बाधित होने की आशंका है।
300 से अधिक छात्र इस प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्रों को रोकने बड़ी संख्या में पुलिस बन की तैनाती पहले ही कर दी गई थी। हालांकि गिरफ्तारी किसी की भी नहीं हुई। पुलिस से झूमाझटकी के दौरान कुछ छात्रों को हल्की खरोंचें भी आईं। विरोध-प्रदर्शन के दौरान यातायात भी कुछ देर के लिए बाधित रहा। रात नौ बजे तक छात्र बूढ़ातालाब स्थित धरना स्थल में बैठे रहे। अपनी मांगें रखते हुए विरोध जारी रखने की चेतावनी के साथ छात्र धरना स्थल से लौटे।
कोरोना काल से काेविड सेंटर में ड्यूटी कर रहे नर्सिंग छात्रों का सब्र अंतत: शुक्रवार को टूट ही गया। नर्सिंग छात्रों ने शुक्रवार को परीक्षा आयोजित करने की मांग करते हुए धरना-प्रदर्शन किया। पूरे प्रदेश से सैकड़ों की संख्या में नर्सिंग छात्र इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने जा रहे छात्रों को पुलिस ने बूढ़ातालाब के पास ही रोक लिया। इस दाैरान पुलिस और छात्रों के मध्य घंटों झड़प हुई। पुलिस द्वारा छात्रों की रैली को रोके जाने के बाद वे वहीं बैठ गए। अपने मांगों को लेकर छात्रों की नारेबाजी देर तक जारी रही।
कई तरह के रोड़े
छात्रों का आरोप है कि आयुष विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा फीस लेने के बावजूद बीते 2 वर्षों से परीक्षा आयोजित नहीं की जा रही है। परीक्षाएं नहीं होने के कारण छात्रों के पास किसी तरह का कोई प्रमाणपत्र नहीं है और वे नौकरी अथवा उच्च अध्ययन के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। परीक्षाएं ना लिए जाने के बाद भी कोरोना काल में सरकार द्वारा आदेश निकाल कर नर्सिंग छात्रों से कोविड सेंटरों में सेवाएं ली गईं।
परिस्थितियां संभलने के बाद जब छात्रों द्वारा परीक्षा की मांग की जा रही है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। दो वर्ष से परीक्षाएं ना होने के कारण वे एक ही कक्षा में अटके हुए हैं। नर्सिंग कॉलेजों की फीस भी उन्हें भरनी पड़ रही है। नौकरी के लिए आयु सीमा भी निकल रही है। इन सबके बाद भी उन्हें ना तो किसी तरह की रियायत दी जा रही है और ना ही परीक्षाओं की तारीख ही घोषित की जा रही है।
इससे नाराज हजारों नर्सिंग स्टाफ ने दोपहर 12:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर डटे रह कर प्रदर्शन किया। उन्हें गिरफ्तार करने बड़ी संख्या में पुलिस और वाहनों की कतार लगी हुई थी। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा एवं संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा ने आंदोलनकारियों का समर्थन करते हुए तत्काल परीक्षाएं आयोजित करने की मांग स्वास्थ्य मंत्री से की है।
