दिल्ली उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में अब अस्पतालों में मरीजों की मौत सिर्फ इसलिए हो रही क्योंकि उन्हे ऑक्सीजन नही मिल पाई।
पंजाब में भी एक अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते 5 मरीजों की मौत हो गई है. यह वाकया अमृतसर के नीलकंठ मल्टीस्पेशियलटी हॉस्पिटल में हुआ है. अमृतसर के नीलकंठ अस्पताल प्रबंधन ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला दिया है. अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि प्रशासन कह रहा कि ऑक्सीजन प्राइवेट अस्पतालों को सरकारी अस्पतालों से पहले नहीं दी जाएगी
मध्य प्रदेश के जबलपुर के गैलेक्सी अस्पताल में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी से 5 मरीज़ों की मौत होने के मामले में पुलिस जांच कर रही है. लॉर्डगंज के SHO ने बताया, “कोविड वार्ड में भर्ती 5 मरीज़ की मौत हुई है. परिजनों की शिकायत है कि समय से ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौतें हुई हैं. शिकायत दर्ज कर ली गई
दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में शुक्रवार शाम ऑक्सीजन की कमी से 25 मरीजों की मौत हो गई। इस बात की जानकारी अस्पताल के वकील ने आज हाईकोर्ट में दी। यहां कोरोना के 215 मरीज भर्ती है जिसमें से कई ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। आज भी अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत है और कई मरीजों की जान पर खतरा बना हुआ है
तमाम राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर दोषारोपण करने में लगी हुई हैं, और अपनी पीठ थपथपाने के लिए नित नई योजनाओं का एलान कर रही। लेकिन सवाल ये उठता है की आखिर जब पता था कि कोरोना की दूसरी लहर दुनिया के हर देश में आ रही और भारत में भी आयेगी, तो सरकारों ने इसकी तैयारी आखिर क्यों नहीं की गई।
जहां एक तरफ कांग्रेस से प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी लगातार ये सवाल उठा रहे की आखिर नरेंद्र मोदी स्टेडियम और गुजरात में 6000 करोड़ की मूर्ति बनाने वाले बीजेपी सरकार ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत क्यू नही किया।
वही केंद्र का कहना है की ये सारे आरोप निराधार हैं, और देश में कही कोई कमी नही है। लेकिन तमाम दावों के बावजूद जनता इस समय रो रही है, खुद को बेबस और मजबूर पा रही है। सवाल ये उठता है की राजनीतिक पार्टियों की आपसी खींचतान में जनता कब तक पिसे।

