भारत में कोरोना वायरस के बिगड़ते हालात पर मंगलवार (27 अप्रैल) सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये बताया है कि कोरोना से निपटने के लिए उनकी नेशनल लेवल पर क्या प्लानिंग है। जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ ने पूछा कि, ”कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार की राष्ट्रीय योजना क्या है? क्या इससे निपटने के लिए वैक्सीनेशव ही मुख्य विकल्प है?” इस सवाल के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, इस मुद्दे पर हाईलेवल का काम चल रहा है। कोरोना संकट को लेकर सरकार उच्चतम कार्यकारी स्तर पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री खुद इस मुद्दे को डील कर रहे हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बोले-हम स्थिति को बहुत सावधानी से संभाल रहे हैं
जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ ने कहा, ऐसी स्थिति में हमें कदम उठाना पड़ते हैं और हमें लोगों के जीवन की रक्षा करने की आवश्यकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ऑक्सीजन की कमी के मामले और कोविड-19 महामारी के प्रबंधन से संबंधित अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हम स्थिति को बहुत सावधानी से संभाल रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी को लगभग दूर कर लिया गया है।
कोरोना वायरस पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
कोरोना के बढ़ते दैनिक आंकड़े और मरीजों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर कोरोना पर नेशनल प्लानिंग के बारे में जानकारी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस एल. नागेश्वर राव, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस. रविंद्र भट की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट में आज दोपहर को शुरू हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस 4 अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार से मांगा है जवाब
- पहला है- ऑक्सीजन की कमी: आखिर कैसे देश में ऑक्सीजन की इतनी कमी हो रही है और मरीजों की जान ऑक्सीजन की कमी की वजह से जा रही है।
- दूसरा है- दवाइयों की आपूर्ति: देश में कोरोना की एंटी वायरल ड्रग रेमेडिसविर जैसी दवाइयों की किल्लत पर क्या है योजना?
- तीसरा है-वैक्सीन की कमी और तरीका: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से वैक्सीनेशन करने के तरीकों के बारे में भी जवाब मांगा है। इसके अलावा वैक्सीन की आपूर्ति कैसे की जाएगी ये भी सरकार को कोर्ट में बताना है।
- चौथा है- देश में लॉकडाउन लगाने का क्या है तरीका, क्या हाई कोर्ट भी इसका फैसला कर सकता है?
