दुनिया को वैक्सीन देने के लिए भारत की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने अपनी प्रोडक्शन क्षमता दोगुनी कर ली है।
स्वदेशी सीरम इंस्टीट्यूट ने सालाना उत्पादन क्षमता 160 करोड़ डोज से बढ़ाकर 250 करोड़ कर ली है। वहीं, भारत बायोटेक भी की सालाना उत्पादन क्षमता 20 करोड़ डोज से 70 करोड़ डोज पर पहुंच गई है।
दुनिया में कोरोना वैक्सीन के मामले में भारत इस समय नंबर वन की भूमिका में है। वैक्सीन बनानी हो या उसकी कीमत या वैक्सीन का असर या दूसरे देशों की मदद हो, मामले में भारत आगे है। हालांकि चीन अपने कम असरदार वैक्सीन के बावजूद दूसरे देशों को टीका देने में भारत के पीछे-पीछे चल रहा है।
इसके अलावा जिन 7 कंपनियों की वैक्सीन बाजार में आनी है, उन्होंने भी अपनी निर्माण क्षमता दोगुनी करने के लिए नए प्लांट लगा लिए हैं।
इस तरह से देश में वर्तमान में वैक्सीन बना रहे व बनाने जा रहे प्लांट की सालाना क्षमता 200 करोड़ डोज तक बढ़ गई है। सभी कंपनियों में कुल 7 हजार लोगों को नए रोजगार मिले हैं।
हैदराबाद स्थित फार्मा कलस्टर जीनोम वैली का लक्ष्य अगले एक दशक में 4 लाख रोजगार देने का है। दुनिया को एक तिहाई वैक्सीन सप्लाई करने वाले जीनोम वैली की क्षमता सालाना 500 करोड़ डोज है। यहां कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों की वैक्सीन भी बनती है। यहां कोरोना वैक्सीन का प्रोडक्शन ही 135 करोड़ डोज होगा।
