SATNA : कलेक्टर अनुराग वर्मा ने बताया कि सतना जिले का कुपोषण से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया था, जहां सात साल की एक बच्ची का वजन सिर्फ सात किलो है। उसे डायबिटीज भी है। कुपोषण का मामला संज्ञान में आने के बाद बालिका को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल की पीकू यूनिट में भर्ती कराया गया है। यहां मेडिकल टीम उसके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। इस मामले में लापरवाही पर CDPO तथा सुपर वाइजर को निलंबित कर दिया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भी सेवा समाप्त कर दी गई है। बालिका के स्वास्थ्य के मामले में मुख्यमंत्री बेहद संजीदा हैं और वे भी उसकी सेहत की जानकारी लगातार ले रहे हैं।
ये है पूरा मामला
आंगनबाड़ी के सरकारी रजिस्टर में बच्ची की जानकारी दर्ज नहीं हुई,जिससे बच्ची को न पोषण आहार मिला न उसका नियमित वजन लिया गया। इससे उसका वजन 7 साल में सिर्फ 7 किलो रहा और किसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने ध्यान नहीं दिया। जबकि बच्ची का वजन डॉक्टरों के हिसाब से करीब 22 किलो होना चाहिए था। कमजोर शरीर पर डायबिटीज ने धावा बोल दिया। जांच में ये 755 मिग्रा प्रति डेसिलीटर पाया गया। सामान्य वयस्क में अधिकतम 200 मिग्रा प्रति डेसिलीटर होता है। यानी वजन सामान्य बच्चों से करीब साढ़े तीन गुना कम और डायबिटीज सामान्य लोगों से साढ़े तीन गुना ज्यादा। बच्ची की तबीयत दो महीने पहले ज्यादा बिगड़ने लगी तो मौसी सीमा ने उसे मझगवां के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां से बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में भेज दिया गया। यहां इलाज के दौरान हुई जांचों में जो सामने आया उसने सबको हैरत में डाल दिया। जानकारी सीएम दफ्तर तक पहुंची। सीएम ने आनन-फानन में जांच के आदेश दिए और बच्ची के इलाज और उसे पूरी तरह सेहतमंद बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हाई लेवल इंक्वायरी टीम सतना पहुंची। इस दौरान टीम चित्रकूट परियोजना के कार्य क्षेत्र में कुपोषित पाई गई बालिका के घर भी गईं और टीम ने अस्पताल पहुंच कर उसका हाल-चाल भी जाना।
महिला एवं बाल विकास विभाग की अतिरिक्त संचालक ने टीम के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं और परियोजना के तहत चल रहे कामकाज का जायजा लिया। जहां ये भी पता चला की महज 7 साल की इस बच्ची की मां का नाम- गोलकी और पिता-राकेश है। बच्ची की मौसी सीमा ने बताया- बच्ची जब मां के पेट में थी, तब उसके पिता गर्भवती पत्नी को छोड़कर किसी और के साथ रहने चला गया। बच्ची दो-तीन साल की रही होगी, तब मां भी उसे छोड़कर चली गई। बेसहारा बच्ची को मौसी ने आसरा दिया। मौसी भी अति निम्न गरीब है और मेहनत-मजदूरी करके पेट पालती है, लेकिन इतना नहीं कमाती कि उसे अच्छी खुराक दे सके। बच्ची की हालत देखकर हर कोई हैरान रह गया है। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. केएल सूर्यवंशी और प्रभारी अधिकारी PICU डॉ. संदीप द्विवेदी की संयुक्त मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार बच्ची को बाल गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। साइडिंग स्केल के अनुसार रेगुलर इंसुलिन, ब्लड शुगर की भी मॉनीटरिंग करने के साथ उसका सर्पोटेड इलाज शुरू किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची की स्थिति फिलहाल स्थिर अवस्था में हैं। जब वह भर्ती कराई गई थी, तब उसका शुगर लेवल 755 था, लेकिन सोमवार की दोपहर हुई जांच में बिना इन्सुलिन दिए यह स्तर 90 मिग्रा पाया गया है। उसे डाइट चार्ट के अनुसार खाना दिया जा रहा है। जुबेनाइल टाइप वन डायबिटीज है, इसे निगरानी से कंट्रोल कर रहे हैं
संबंधित बाल विकास परियोजना चित्रकूट-1 की परियोजना अधिकारी भाग्यवती पांडेय को कलेक्टर अनुराग वर्मा के प्रस्ताव पर कमिश्नर रीवा संभाग अनिल सुचारी ने निलंबित कर दिया है। CDPO को मुख्यालय में नहीं रहने, योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग एवं निगरानी नहीं करने और परियोजना क्षेत्र में ICDS की सेवाओं का लाभ उचित ढंग से नहीं पहुंचाने का दोषी पाया गया। उन्हें DPO कार्यालय सतना से अटैच किया गया है। उनके स्थान पर सहायक संचालक राजेन्द्र बांगरे को चित्रकूट परियोजना का जिम्मा सौंपा गया है। इसी मामले में कलेक्टर ने क्षेत्र की सुपरवाइजर तत्कालीन पर्यवेक्षक सेक्टर चित्रकूट-1 प्रीति पांडेय को तत्काल प्रभाव




