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केजरीवाल के सामने नया संकट अब हर फैसले के लिए राज्यपाल से लेनी होगी इजाजत?

newsmrl.com delhi aap tragedy update by Rajinder singh

दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच बड़ा और अहम बदलाव हुआ है।

केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) कानून, 2021 मंजूरी दे दी गई है। इसके बाद दिल्ली में ‘सरकार’ का आशय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल से है। कुल मिलाकर अब दिल्ली में सारे बड़े और अहम फैसले उपराज्यपाल की अनुमति के बाद ही लागू किए जा सकेंगे।

कानून के उद्देश्यों एवं कारणों के अनुसार, अब दिल्ली विधानसभा में पारित विधान के परिप्रेक्ष्य में ‘सरकार’ का आशय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल से हो गया है। इसमें दिल्ली की स्थिति संघराज्य क्षेत्र की है, जिससे विधायी उपबंधों के निर्वाचन में अस्पष्टताओं पर ध्यान दिया जा सके।। इस संबंध में धारा 21 में एक उपधारा जोड़ी गई है।

NCT एक्ट से जुड़ा यह संशोधित बिल दोनों सदनों से पास होने का कानून बन चुका है। इसके तहत दिल्ली के उपराज्यपाल को कुछ अतिरिक्त शक्तियां मिली हैं। इसके बाद बुधवार से ही दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार को उपराज्यपाल से कुछ मामलों में मंजूरी लेनी जरूरी हो जाएगी। संशोधित कानून के मुताबिक, दिल्ली सरकार को विधायिका से जुड़े फैसलों पर LG से 15 दिन पहले और प्रशासनिक मामलों पर करीब 7 दिन पहले मंजूरी लेनी होगी, इसे लेकर ही दिल्ली सरकार आपत्ति जता रही थी।

केंद्र सरकार की ओर से पहले ही कहा जा रहा है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम, 1991 में संशोधन के लिए मोदी सरकार द्वारा लाए हुए दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) अधिनियम, 2021 को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

दिल्ली के उपराज्यपाल को सशक्त बनाने वाला दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन संशोधन विधेयक-2021 पिछले महीने लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया था। यह अलग बात है कि विपक्षी दलों ने इसका जमकर विरोध किया था।

केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद दिल्ली में सरकार का मतलब ‘एलजी’ हो गया है। इसके बाद विधानसभा से पारित किसी भी विधेयक को मंजूरी देने की ताकत उपराज्यपाल के पास आ गई है। इसमें यह भी प्रवाधान किया गया है कि दिल्ली सरकार को शहर से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले उपराज्यपाल से सलाह लेनी होगी।

इसके अलावा दिल्ली सरकार अपनी ओर से कोई कानून खुद नहीं बना सकेगी। इसमें यह भी कहा गया है कि विधेयक विधान मंडल और कार्यपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का बढ़ाएगा। साथ ही निर्वाचित सरकार और राज्यपालों के उत्तरदायित्वों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के शासन की संवैधानिक योजना के अनुरूप परिभाषित करेगा।

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