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व्यास सम्मान से सम्मानित हुए वरिष्ठ साहित्यकार शरद पगारे।

Newsmrl.com vyas samman news update by kiran rawat

वरिष्ठ साहित्यकार शरद पगारे को साल 2020 के लिए केके बिड़ला फाउंडेशन की तरफ से व्यास सम्मान की घोषणा की गई है.

उन्हें यह सम्मान वर्ष 2010 में आए उनके उपन्यास ‘पाटलिपुत्र की सम्राज्ञी’ के लिए दिया गया है. यह सम्मान पिछले दस वर्षों में प्रकाशित किसी भारतीय नागरिक की उत्कृष्ट हिंदी कृति पर दिया जाता है. इसके तहत चार लाख रुपए की पुरस्कार राशि के साथ एक प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह भेंट किया जाता है.

यह निर्णय हिंदी साहित्य के विद्वान प्रोफेसर रामजी तिवारी की अध्यक्षता में संचालित एक चयन समिति ने किया. वे व्यास सम्मान पाने वाले मध्य प्रदेश के पहले हिंदी लेखक हैं. उन्हें इस सम्मान में चार लाख रुपए की पुरस्कार राशि के साथ ही प्रशस्ति और प्रतीक चिन्ह भेंट किया जाएगा.

शरद पगारे को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भारतभूषण सम्मान के अतिरिक्त कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. उनके अब तक छ: कहानी संग्रह, दो नाटक व शोध प्रबंध प्रकाशित हुए हैं. भारत ही नहीं विदेशों में भी इनके प्रामाणिक इतिहास ज्ञान की सराहना की गई है.


शरद पगारे इतिहास के विद्वान, शोधकर्ता और प्राध्यापक रहे हैं. पगारे ने वृंदावन लाल वर्मा की ऐतिहासिक उपन्यास परम्परा के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है. एक इतिहासकार होने के साथ ही वे सफल कथाकार भी हैं. वे इन दिनों सेवानिवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन में संलग्न हैं.


व्यास सम्मान की शुरुआत साल 1991 में केके बिड़ला फाउंडेशन द्वारा की गई थी.

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