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Fastival Special- सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, जानें विधिनुसार पूजा प्रक्रिया।

newsmrl.com Festival Special- First Mangla Gauri fast of Sawan, know the process of worship according to the method. update by Rihan Ibrahim

मंगला गौरी व्रत का महत्व

इस व्रत को ज्यादातर महिलाएं रखती हैं. मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही उनके पति को दीर्घायु मिलती है. यदि नव विवाहित स्त्री इस व्रत को रखती हैं तो उनका पूवेटरा वैवाहिक जीवन अच्छे से गुजरता है. वहीं ​जिन लड़कियों को मनचाहा वर न मिल पा रहा हो, उनको भी मंगला गौरी का व्रत रखना चाहिए और मां पार्वती की पूजा करनी चाहिए. सावन के महीने में ही माता पार्वती की तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए थे और उनसे विवा​ह के लिए राजी हो गए थे. कहते हैं कि अगर कोई कुंवारी लड़की इस दिन मां पार्वती की पूजा कर उनसे सुयोग्य वर की कामना करती है, तो माता उस कामना को जरूर पूरा करती हैं. मान्यता है कि इस व्रत को शुरू करने के बाद कम से कम पांच साल तक रखा जाता है. हर साल सावन में 4 या 5 मंगलवार के व्रत होते हैं. आखिरी व्रत वाले दिन उद्यापन किया जाता है.

भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के लिए सावन का महीना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. इस पूरे महीने में महादेव के भक्त उनकी पूजा करते हैं और उन्हें जल चढ़ाते हैं. गत 25 जुलाई से ही सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है. आज 26 जुलाई को पहला सावन सोमवार है. शास्त्रों में सावन सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आपको बता दें कि सावन के महीने में जितना महत्व सोमवार का है, उतना ही मंगलवार का भी है. कहा जाता है कि यदि किसी के वैवाहिक जीवन में कोई समस्या हो रही हो या विवाह में कोई अड़चन आ रही हो या फिर संतान सुख प्राप्त न हो रहा हो तो उसे मंगला गौरी का व्रत करना चाहिए. मंगला गौरी का व्रत सावन माह मंगलवार के दिन रखना चाहिए और इस दिन माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. कल सावन का पहला मंगलवार पड़ रहा है. आइए आपको बताते हैं इस दिन आप मंगला गौरी की पूजा कैसे कर सकते हैं.

मंगला गौरी व्रत विधि

सावन महीने के प्रत्येक मंगलवार को सुबह उठकर स्नान कर नए वस्त्र पहनें. चौकी पर आधे हिस्से में सफेद कपड़ा बिछाएं और आधे हिस्से में लाल कपड़ा बिछाएं. सफेद वाले हिस्से में चावल के नौ छोटे ढेर बनाकर नवग्रह तैयार करें. वहीं लाल हिस्से में गेहूं के सोलह ढेर बनाएं. इसके बाद चौकी पर अलग स्थान पर थोड़े से चावल बिछाकर पान का पत्ता रखें. पान पर स्वास्तिक बनाएं और गणपति बप्पा को विराजमान करें. इसके बाद गणपति जी की और नवग्रह का रोली, चावल, पुष्प, धूप से विधिवत पूजन करें. गेहूं की ढेरियों का भी पूजन करें.

इसके बाद एक थाली में मिट्टी से माता मंगला गौरी की प्रतिमा बनाएं. इसे चौकी पर स्थापित करें. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें और अपनी मनोकामना को कहकर उसे पूरा करने की मातारानी से विनती करें. इसके बाद मातारानी को पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं. माता पार्वती को सोलह लड्डू, पान, फल, फूल, लौंग, इलायची और 16 श्रंगार का सामान चढ़ाएं. मां के सामने 16 बत्तियों वाला एक दीपक जलाएं या 16 अलग-अलग दीपक जलाएं. इसके बाद मंगला गौरी व्रत की कथा पढ़ें और मां की आरती गाएं. पूजा समाप्त होने पर सभी वस्तुएं ब्राह्मण को दान कर दें. व्रत चाहे निर्जला रखें या फलाहार लेकिन कोशिश करें कि नमक का सेवन बिल्कुल न करें. शाम को अपना व्रत खोल दें.


(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. newsmrl इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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