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ट्रांसजेंडरों को रोजगार देने वाली कंपनियों को टैक्स राहत मुमकिन

newsmr.com Tax relief possible for companies employing transgenders update by karan Roy

Order No. 0356#RPR

बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने हाल ही में संसद में बयान दिया कि अगर कोई कंपनी अपने यहां कुल कर्मचारियों में 10 प्रतिशत या कम से कम 100 ट्रांसजेंडरों को काम पर रखती है तो उसे टैक्स में सीधे छूट मिलेगी.

इस प्रस्ताव के बारे में कमाल ने संसद में कहा, “तीसरा लिंग समुदाय हाशिए पर है और समाज का वंचित वर्ग है.” बांग्लादेश में ट्रांसजेंडर समुदाय दशकों से समाज से कटा हुआ है. कमाल ने कहा, “दूसरों की तुलना में, थर्ड जेंडर समुदाय पिछड़ रहा है…और मुख्यधारा के समाज से बाहर निकल गया है. इसमें सक्रिय लोगों को शामिल कर सामाजिक समावेश सुनिश्चित किया जा सकता है. ऐसे लोगों को उत्पादन-उन्मुख व्यवसाय में रोजगार दिया जा सकता है.”

अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि दक्षिण एशियाई देशों में ट्रांसजेंडर अक्सर कम उम्र में ही अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं. उन्हें ना तो अच्छी शिक्षा मिल पाती है और ना ही नौकरी. आखिरकार उन्हें भीख मांग कर या गरीबी में अपना जीवन बिताना पड़ता है. पिछले साल नवंबर में ढाका में किन्नर समुदाय के लोगों की इस्लामी शिक्षा के लिए केंद्र खोला गया था. इसके मौलवी अब्दुर्रहमान आजाद कहते हैं, “जो लोग ट्रांसजेंडर होते हैं वे भी इंसान होते हैं, उन्हें भी शिक्षा का अधिकार है. उन्हें भी सम्मानजनक जिंदगी जीने का अधिकार है.”

योजनाओं से ज्यादा की जरूरत
बांग्लादेश सरकार का अनुमान है कि देश में 11,500 ट्रांसजेंडर हैं जबकि अधिकार समूहों का कहना है कि उनकी आबादी एक लाख से अधिक हो सकती है. 2013 में सरकार ने ऐतिहासिक फैसले में एलजीबीटी प्लस को तीसरे लिंग की मान्यता दी थी, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं आया है और समलैंगिक सेक्स अब भी गैर कानूनी है.

अधिकार समूहों ने नए प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसके संसद से पारित होने की उम्मीद है, लेकिन समूहों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया यह प्रस्ताव ठीक से क्रियान्वित किया जाए. अधिकार समूह संपोर्कर नोया सेतु की जोया शिकदर कहती हैं, “ऐसी कई घोषणाएं हैं जो कि ट्रांसजेंडर समुदाय के समर्थन में की जाती हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर योजनाएं काम नहीं करतीं. सरकार को इन योजनाओं पर नजर रखने की जरूरत है.”

इसी साल मार्च में देश में पहली ट्रांसजेंडर न्यूज एंकर ने समाचार पढ़कर इतिहास रचा था. 29 वर्षीय तश्नुआ आनन ने ट्रांसजेंडर लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण और नियोक्ताओं के लिए जागरूकता प्रशिक्षण सत्र आयोजन की मांग की है. उन्होंने कहा, “यह एक अच्छी पहल है, लेकिन ये कदम बहुत बड़े पैमाने पर उठाए जाने चाहिए. ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को भी अपने कौशल को विकसित करने की जरूरत है, तभी जाकर उन्हें नौकरी पर रखा जा सकता है.”

ट्रांसजेंडर लोगों को काम पर रखने वाली बांग्लादेशी कंपनियों को टैक्स में छूट दी जा सकती है. क्योंकि सरकार उन लोगों की नौकरी की संभावनाओं को बढ़ावा देना चाहती है. इसे समुदाय के लोगों के लिए सकारात्मक कदम बताया जा रहा है.

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