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आगरा में मिला ‘एस्परजिलस’ फंगस का मरीज, बायोप्सी रिपोर्ट में पुष्टि

newsmrl.com 'Aspergillus' fungus patient found in Agra, confirmed in biopsy report update by Akanksha Tiwari

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ताजनगरी में ब्लैक फंगस के संदिग्धों के बीच ‘एस्परजिलस’ फंगस का मरीज मिला है।

इसे व्हाइट फंगस का ही एक रूप माना जाता है। यह ब्लैक फंगस से कुछ कम खतरनाक मगर समान लक्षणों वाला होता है। इसका इलाज भी अलग है। ब्लैक फंगस के रोगियों को दिए जाने वाले इंजेक्शन आदि राहत नहीं दे पाते हैं।

दरअसल एसएन मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को लगभग 40 साल के मरीज का ऑपरेशन किया गया था। यह मरीज खैर अलीगढ़ का है। ऑपरेशन के बाद इसके नमूने बायोप्सी के लिए माइक्रो बायोलॉजी लैब भेजे गए थे। शनिवार को इसकी रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट के मुताबिक मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई है, बल्कि उसमें एस्परजिलस पाया गया है। डॉक्टर इसे व्हाइट फंगस का ही एक रूप मानते हैं। ब्लैक और व्हाइट फंगस की अपेक्षा यह थोड़ा कम खतरनाक है। लेकिन इसमें अन्य फंगस संक्रमण की तरह इलाज नहीं होता। ब्लैक फंगस में एंफोटेरेसिन-बी इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता है। इसमें बोरी ‘कोनोजोल’ टेबलेट का इस्तेमाल किया जाता है। शेष प्रक्रियाएं वही रहती हैं। बायोप्सी रिपोर्ट आने के बाद इस मरीज का इलाज भी अब दूसरे तरीके से ही किया जा रहा है।

इस तरीके से करें बचाव

  • कामकाजी हैं तो दो मिनट मास्क उतारकर गहरी सांस लेते रहें।
  • – इसके लिए कार्यालय की छत या अन्य सुरक्षित स्थान ठीक रहेगा।
  • घर आने पर मास्क उतारने के बाद हल्के हाथों से ब्रश जरूर करें।
  • – ब्रश करने के बाद पर्याप्त पानी पिएं, दो से तीन बार भी कर सकते हैं।
  • खाना खाने के बाद अंगुली से दांतों की साधारण मालिश जरूर करें।
  • – बीटाडीन से दिन में दो से तीन बार गरारे करने से भी बचाव होगा।

ये हैं व्हाइट फंगस के दो रूप
व्हाइट फंगस के दो रूप होते हैं। कैंडिंडा और एस्परजिलस। कैंडिंडा घातक होता है जिससे त्वचा में इन्फेक्शन, मुंह में छाले, छाती में संक्रमण, अल्सर जैसी समस्या हो सकती है। एस्परजिलस कम घातक है। इसका संक्रमण फेफड़ों, सांस नली, आंख की कार्निया को प्रभावित करता है। इससे अंधत्व का खतरा रहता है।

इसमें चमकती हुई लाइनें दिखती हैं। इससे पता चल जाता है कि यह व्हाइट का ही रूप है। जबकि ब्लैक में खून की सप्लाई रुकने से संबंधित स्थान काला पड़ जाता है। हालांकि एस्परजिलस कम खतरनाक है।
डॉ. आरती अग्रवाल, प्रभारी माइक्रो बायोलॉजी विभाग एसएनएमसी।

इस मरीज की जांच रिपोर्ट के बाद हमने इलाज का तरीका बदल दिया है। संबंधित फंगल इन्फेक्शन की दवाएं दी जा रही हैं। इस मरीज को ब्लैक फंगस की दवाओं और इंजेक्शन से फायदा नहीं होगा।
डॉ. अखिल प्रताप सिंह, प्रभारी टीम फंगस एसएनएमसी।

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