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सामने आई ब्लैक फंगस की असली वजह- बचाव बेहद आसान, बस करना होगा ये काम।

newsmrl.com The real reason for the black fungus surfaced - rescue is very easy, just have to do this work. update by Rihan ibrahim

मास्क में नमी के कारण फैल रहा है ब्लैक फंगस, एक्सपर्ट ने बताया मास्क पहनते समय बरतें क्या सावधानियां

हाई लाइट

  • वाल्व वाले मास्क ना पहने
  • दोबारा इस्तेमाल करने वाले मास्क धोने लायक होने चाहिए, ऐसे मास्क को रोज डेटॉल से धो कर धूप में सूखा कर ही पहने।
  • 2 मास्क पहनने की आदत डालें। पहला कॉटन या खादी से बना हुआ, जो गीला ना रहे हवा लगने से सूखे, दूसरा उसके ऊपर n95।
  • n95 को ज्यादा दिन तक न पहने, जैसे ही उसमे फंगस दिखे उसे नष्ट कर दें।
  • किसी भी तरह का धूम्रपान करने वाले खतरे में।
  • ब्लैक फंगस किसी को भी हो सकता है, कोरोना से कमजोर हुए लोगों समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित लोग ज्यादा आसान शिकार जितनी कमजोर इम्यूनिटी उतना ज्यादा खतरा ।
  • धूल गर्दे वाली जगहों पर जाने से बचें, ध्यान रखें ब्लैक फंगस इंसानों से नही, प्रदूषण से फैल रहा।
  • घर पे पंखों और exhaust fan समेत ac की नियमति साफ सफाई करें उसमे जमी हुई ब्लैक फंगस को गीले कपड़े से पोंछे, उसे झाड़ू से न झाड़ें।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केशव स्वामी ने बताया कि फंगस वातावरण में पाया जाता है । बरसात के मौसम में ब्लैक फंगस फैलने की आशंका अधिक होती है। कोविड-19 से रिकवर हुए लोग प्रतिदिन मास्क को डेटॉल में धोकर धूप में सुखाकर ही पहने

देश में कोविड 19 के मरीजों में म्यूकोरमायकोसिस ( ब्लैक फंगस ) के मामलों में हो रही वृद्धि के पीछे मास्क में नमी का होना माना जा रहा है। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ एस एस लाल ने एक मीडिया एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा कि म्यूकोरमायसिस ( ब्लैक फंगस) नामक इस रोग के होने के पीछे लंबी अवधि तक इस्तेमाल किया गया मास्क हो सकता है। मास्क पर जमा होने वाली गंदगी के कण से आंखों मे फंगस इन्फेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा मास्क में नमी होने पर भी इस तरह का इन्फेक्शन हो सकता है।

डॉक्टर लाल ने बताया कि आईसीयू में भर्ती कोविड 19 के मरीज को लंबे समय तक इलाज के दौरान लगाए जाने वाले ऑक्सीजन के कारण भी यह फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। उन्होंने बताया कि कोविड पेशन्ट को स्टेरॉयड की हाई डोज दी जाती है । जिसकी वजह से मरीज का शुगर लेवल बढने से इस तरह के संक्रमण के बढ़ने की अपार संभावना होती है।

डॉक्टर लाल ने बताया कि फंगस के संक्रमण की शुरुआत नाक से होती है । नाक से ब्राउन या लाल कलर का म्यूकस जब बाहर निकलता है तो यह शुरुआती लक्षण ब्लैक फंगस का माना जाता है फिर यह धीरे धीरे आंखो मे पहुंच जाता है । नेत्रों में लालीपन, डिस्चार्ज होना, कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण इस रोग में उभरते हैं। नेत्रों में भंयकर पीडा होती है और फिर विजन पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इस फंगस का असर नेत्रों के रेटिना पर पडता है फिर ब्रेन,नर्वस सिस्टम व ह्रदय तक हो जाने से मृत्यु तक हो जाती हैं

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