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जानिए रायपुर ग्रामीण से ग्राउंड रिपोर्ट क्या हाल है मजदूरों का

newsmrl.com Know what is the condition of laborers from Raipur Rural. update by Rihan ibrahim

रायपुर की श्रमिकों की बस्ती से ग्राउंड रिपोर्ट लॉकडाउन से कर्ज में डूबे मजदूर, नमक के साथ खाते हैं चावल, क्योंकि सब्जी खरीदने के पैसे नहीं, बोले-कोरोना नहीं ये बदहाली हमें मार देगी

रायपुर शहर के डंगनिया इलाके में खदान बस्ती है। यहां श्रमिकों के 2 दर्जन से अधिक परिवार रहते हैं। कोई मकान बनाने में ईंटें ढोने का काम करता है, तो कोई घरों में रोजमर्रा का काम। मगर अब सब कुछ बंद है। दैनिक भास्कर की टीम यहां की गलियों में पहुंची तो मजदूरों की जुबां पर वो दर्द आया जो लॉकडाउन की वजह से उपजे हालातों ने इन्हें दिया है। वो दर्द जो अनूमन सरकार में बैठे जिम्मेदार या तो सुन नहीं पाते या शायद सुनना नहीं चाहते।

सरकार के लोग हमारी तरह जीवन जीकर देखें
गोदावरी तारक रायपुर के सुंदर इलाके में बन रहे कॉम्प्लेक्स में मजदूरी का काम कर रही थीं। होली त्योहार के पहले छुट्‌टी कर दी गई और इसके बाद लॉकडाउन लग गया। गोदावरी ने बताया कि रोजी के जो 150 से 200 रुपए मिलते थे, वो मिलने बंद हो गए। घर के खर्च को दूसरों से रुपए मांगकर चलाया, हम हालत खराब हो चुकी है। हमें बिना मजदूरी के कुछ नहीं मिलता, हम कैसा जीवन जी रहे हैं, जीकर देखें सरकार के लोग। दाल, सब्जी कुछ नहीं है घरों में। हम जैसों को कुछ आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।

मालिकों ने कह दिया कोरोना फैला है, काम पर मत आना
इसी बस्ती में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वो रायपुरा इलाके में कुछ परिवारों के घर पर काम करने जाती थी। मगर लॉकडाउन लगते ही उसे काम से निकाल दिया गया, मालिकों ने कह दिया कि कोरोना फैल रहा, तुम अब काम पर मत आना। महिला ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में घरों का काम करके जो रुपए जमा किए थे अब उसी से घर चल रहा है, लॉकडाउन यूं ही चलता रहा तो पता नहीं हमारा गुजारा कैसे होगा।

लोगाें की गालियां सुनने के बाद चूल्हा जलता है
मुन्नी प्रजापति छोटी मूर्तियां बनाकर बेचतीं थीं, दो महीने से इनका काम बंद पड़ा हुआ है। घर पर सिलेंडर है मगर अब रोज चावल चूल्हे पर पकातीं हैं, क्योंकि सिलेंडर को रीफिल कराने के लिए इनके पास पैसे नहीं है। आस-पास के पेड़ों की सूखी टहनियों को काटती हैं, ताकि चूल्हा जल सके जिनके पेड़ होते हैं वो गालियां देते हैं, ये सब सहने के बाद घर पर चूल्हा जलता है। मुन्नी चाहती हैं सरकार ऐसे गरीब परिवारों को सिलेंडर, या किसी तरह से पैसों से सब्जियां देकर मदद कर दे।

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