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ममता के TMC नेताओं पर CBI सख्त; पर BJP में जा चुके शुभेंदु और मुकुल पर बरत रही नरमी?

newsmrl.com CBI strict on Mamta's TMC leaders; But has been softened on Shubhendu and Mukul who have gone to BJP update by kiran rawat

सीबीआई ने सोमवार को नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार के दो मंत्रियों सहित तृणमूल कांग्रेस के चार नेताओं को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ द्वारा इस महीने अभियोजन की मंजूरी दिए जाने के बाद चार नेताओं- मंत्री फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा, सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि सीबीआई की तरफ से यह कार्रवाई तब की गयी है जब हाल ही में टीएमसी ने बीजेपी को विधानसभा चुनाव में भारी अंतर से पराजित किया है।संयोग से, सीबीआई ने चार गिरफ्तार नेताओं के खिलाफ जनवरी में ही राज्यपाल को मुकदमा चलाने के लिए अनुरोध भेजा था। राज्यपाल की तरफ से मंजूरी चुनाव परिणाम के पांच दिनों के भीतर ही दे दी गयी। बताते चलें कि सीबीआई द्वारा 6 अप्रैल, 2019 को लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गये रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी अधिकारी सहित 11 अन्य लोग इस मामले के आरोपी हैं।

लेकिन कुछ बातें जो जांच एजेंसी की तरफ से नहीं कही गयी वो बहुत कुछ बताती है। इस मामले के कुछ अन्य आरोपी जिन्होंने हाल ही में टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है उनके ऊपर मुकदमा चलाने की अनुमति अभी तक सीबीआई को नहीं मिली है। जहां शुभेन्दु अधिकारी का मामला राज्यपाल के पास अटका है वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के लिए आवेदन ही सीबीआई की तरफ से नहीं की गयी है। मुकुल रॉय 2017 में टीएमसी से अलग होने वाले पहले नेताओं में से थे। जांच एजेंसी की प्राथमिकी में उन्हें पहला आरोपी बनाया गया था।

अधिकारी 2014 में लोकसभा सांसद थे, जब नारद स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था। बाद में 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले उसे प्रसारित किया गया था। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि अनुरोध के चार महीने के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभियोजन की मंजूरी दी जानी चाहिए या खारिज कर दी जाती है।सोमवार को जिनकी गिरफ्तार हुई है उनके ऊपर भी अधिकारी और रॉय के समान ही आरोप हैं।

इस मामले में रॉय और अधिकारी और सोमवार को गिरफ्तार किए गए चारों नेताओं के अलावा लोकसभा सांसद सौगत रॉय, अपरूपा पोद्दार, सुल्तान अहमद, प्रसून बनर्जी और काकोली घोष दस्तीदार शामिल हैं; विधायक इकबाल अहमद; और, आईपीएस अधिकारी एस एम एच मिर्जा का नाम भी इस मामले में है। बताते चलें कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सीबीआई को नारदन्यूज डॉट कॉम पोर्टल पर प्रसारित टेपों की प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया था। इस आदेश को पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर साल 2017 में अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया था।

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