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जिस गंगा को मां माना अब उसी को बरबाद करने पर तुले लोग, कोरोना शव? को किया प्रवाहित

newsmrl.com The people whom the Ganges considered to be the mother, are bent upon destroying it, corona corpse? Flown on, frightened by the fear of a big pandemic update by Pooja goswami

ये विडंबना ही है की जिस गंगा को मां मान के पूजा जाता है, उसी गंगा का ये हाल खुद समाज के द्वारा किया जाना दुनिया भर में उपहास का और देश में त्रासदी का कारण का कारण बनता है।

वहीं गंगा नदी में शव प्रवाहित करने पर हिंदू समाज के जानकारों का कहना, शमशान घाट में कर्म काण्ड के नाम पर लूट मची हुई है, लकड़ियों के अनाप शनाप दाम वसूले जा रहे, तो शव को गंगा में बहाना मजबूरी!

लेकिन इस वजह से जो भयानक नतीजे आएंगे उसका जिम्मेदार कौन होगा? शव जब नदी में फूल के फटेंगे तो उस वजह नदी सिर्फ दूषित ही नही विषैली भी बन जाएगी, वही गंगा नदी जो पहले से कारखानों से निकली गंदगी, शहरों के गटर का पानी, इन सबकी वजह से पहले से ही बेहाल है, अब शवों की वजह से दूषित होने की कगार पे आ गई,

  • बिहार के बक्सर के बाद अब यूपी के गाजीपुर जिले स्थित गंगा नदी में तैरते हुए शव दिखाई दिए
  • यूपी-बिहार बॉर्डर के गहमर गांव की घटना है जो गाजीपुर के गहमर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है
  • कोरोना महामारी के बीच नदियों में बड़ी संख्या में शव मिलने से गहमर गांव के लोगों में दहशत

हमीरपुर में यमुना नदी में दिखे शव
उधर, हमीरपुर जिले में यमुना नदी में शव नजर आने के बाद लोगों में दहशत फैल गई और यह संदेह भी जताया गया कि यह कोविड-19 से जान गंवाने वालों की लाशें हैं। हालांकि, सोमवार को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया।

हमीरपुर के जिलाधिकारी ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, ‘लोगों से बातचीत तथा शव को देखने से प्रथम दृष्टया ये कोरोना वायरस से हुई मृत्यु से संबंधित नहीं पाए गये, क्योंकि शव के ऊपर सामान्य परंपरागत शवों के कपड़े थे और किसी भी शव पर कोरोना से मृत्यु होने पर की जाने वाली पैकिंग नहीं थी।’उन्होंने कहा कि सभी शवों को सम्मानजनक तरीके से निस्तारित करा दिया गया है।

गाजीपुर
बिहार के बक्सर के बाद अब यूपी के गाजीपुर जिले स्थित गंगा नदी में तैरते हुए शव दिखाई दिए। कोरोना महामारी के बीच नदियों में बड़ी संख्या में शव मिलने से लोगों में दहशत है। लोगों में संक्रामक रोग फैलने का डर बना हुआ है। मौके पर पुलिस अधिकारियों की टीम पहुंचकर जांच में जुटी है।

यूपी-बिहार बॉर्डर के गांव की घटना
गाजीपुर से बिहार की तरफ बहने वाली गंगा नदी गहमर गांव से होकर गुजरती है। इसके आगे बिहार का चौसा क्षेत्र लगता है जहां के महादेवा घाट पर सोमवार को शव मिलने से हड़कंप मच गया था। चौसा के जिला प्रशासन को संदेह है कि ये शव यूपी से बहकर आए हैं।

शवों का स्रोत जानने के लिए चौसा एसडीएम कृष्णा कुमार उपाध्याय अपने टीम के साथ सोमवार को जिले के बारा पहुंचे और गाजीपुर के सेवराई तहसील एसडीएम के साथ संयुक्त रूप से गंगा घाट का मुआयना किया।

गाजीपुर डीएम एमपी सिंह ने बताया, ‘हमें घटना की जानकारी मिली है, हमारे अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और जांच चल रही है। हम यह तलाशने की कोशिश कर रहे हैं कि ये शव कहां से आए हैं।’ यूपी-बिहार बॉर्डर के गहमर गांव की घटना है जो गाजीपुर के गहमर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहां गंगा नदी में दर्जनों शव उतराते हुए दिखे हैं।

मध्यप्रदेश के रुंझ नदी में बहती मिली 6 लाशें

इधर, मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के गांव नंदनपुर से खबर है कि वहां से निकली रूंझ नदी में भी 6 लाशें मिलने से हड़कंप मच गया। लोगों में दहशत फैल गई है। धरमपुर पुलिस के मुताबिक शवों को बाहर निकाला और अन्य शवों की तलाश मंगलवार शाम तक जारी थी। यह शव कोविड संक्रमितों के थे या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यह भी माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की सीमा भी लगी हुई है। आशंका जताई जा रही है कि यह शव उत्तर प्रदेश से बहकर आए हैं।

जानिए की देश की शीर्ष अलग अलग मीडिया इस बारे में क्या कहती हैं।

NDTV और BBC की रिपोर्ट के मुताबिक बक्सर में 71 लाशों का पोस्टमार्टम कराया गया है. बक्सर में लाशें बहती मिलने से अधिकारी और ग्रामीण सभी हैरान परेशान थे. 11 मई को गाजीपुर और बलिया में भी लाशें गंगा नदी में बहती हुई मिलीं. हिंदुस्तान अखबार की एक रिपोर्ट कहती है कि बलिया में प्रशासन ने करीब 46 शवों को नदी से बाहर निकलवाया और जेसीबी से खुदाई कराकर सभी शवों को दबा दिया.

आजतक से जुड़े रौशन जायसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी और आसपास के इलाकों में शवों को जल में प्रवाहित करने की परंपरा नहीं रही है. ऐसे लोग जिनकी इच्छा गंगा में प्रवाहित कराए जाने की रही है या फिर किसी को सांप ने काट लिया हो, ऐसे लोगों को ही गंगा में प्रवाहित किया जाता है. वाराणसी के श्मशानों में लकड़ी के रेट भी नहीं बढ़ाए गए हैं जिससे ये माना जाए कि महंगे अंतिम संस्कार के कारण वाराणसी से शवों को गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है.

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट कहती है कि कानपुर और उन्नाव में 1 हजार से अधिक लोगों को अभी तक गंगा नदी के किनारे दफन किया जा चुका है. लकड़ियों से अंतिम संस्कार करने से दफन करना सस्ता पड़ता है. साथ ही इतनी लाशें जली हैं कि लकड़ियां खत्म हो चुकी हैं. ऐसे में लोग हिंदू परंपरा को छोड़ते हुए शवों को मजबूरी में दफन कर रहे हैं. लाशों पर नमक भी डाला जा रहा है ताकि जल्द ही वह डिकंपोज हो जाएं. रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि गंगा में जलस्तर बढ़ा तो लाशें आगे बह सकती

हम सभी जानते हैं की कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है और इसी वजह से कोरोना मरीजों के शवों को लेकर एक प्रोटोकॉल है. उसी के हिसाब से दुनिया भर में कोरोना पीड़ितों के शवों को पीपीई आदि में पैक किया जाता है. सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में इस प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ही शव को परिवार को सौंपा जाता है और अंतिम संस्कार के वक्त भी परिवार के लोग पीपीई किट आदि पहनते हैं.

The people whom the Ganges considered to be the mother, are bent upon destroying it, corona corpse? Flown on, frightened by the fear of a big pandemic

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