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लॉकडाउन का सही मतलब क्यूं नही समझ पा रहे लोग ,जानिए लॉक डाउन के बाद भी बढ़ते संक्रमण की वजह

newsmrl.com Editorial Blog by Rihan Ibrahim

संपादकीय : Rihan Ibrahim newsmrl.com

पिछले साल से ही लॉकडाउन को सरकार द्वारा थोपा गया एक बंदिश कानून समझ कर लोग इसका मजाक बनाने में लगे हुए हैं लोगों को लगता है जैसे इस लॉक डाउन की जरूरत क्या जब संक्रमण बढ़ ही रहा।

लेकिन लोग ये नही समझ रहे की अगर लॉक डाउन नही हो तो स्थिति आज से भी भयावह हो जायेगी आज अगर प्रतिदिन 4 लाख केस आ रहे तो लॉकडाउन नही करने पर रोज के 10 लाख केस आने लगेंगे।

कोरोना की तीसरी लहर के बारे में चर्चा चल रही की आने वाला है, जहां तक महसूस हो रहा की वो आ चुका है, बड़े अफसोस कि बात है की भारत अब नंबर 2 पे है, और जल्द ही नंबर 1 हो जायेगा यही हाल रहा तो,
सरकार की कमी ये थी कि उसकी तैयारी नही थी 2nd वेव को ले के जो की आना ही था।
लेकिन जनता भी कम नहीं थी, कोरोना से बचने का मूल मंत्र था 6 फीट की दूरी और सबके नाक और मुंह पे मास्क, कितने लोग इस नियम का पालन करते है?

सरकार को कोसना बंद करो वो लापरवाह थी तो हम कौन सा सावधान थे? आज भी लॉक डाउन का मजाक बना रखा है, लॉक डाउन का मतलब होता है “अपने अपने घरों में लॉक होना, लेकिन शाम के 5 बजते ही तमाम कॉलोनियों में लोग घरों से निकल के आपस में गॉसिप करने बैठ जाते हैं, तो कैसे टूटेगी संक्रमण की चेन?


“बिना वजह घर से ना निकालना और 6 फिट की दूरी और सबके नाक मुंह में डबल मास्क बस यही है जो बचा सकता है इस देश को तीसरी खतरनाक लहर से जो 50% ज्यादा खतरनाक है पहली लहर के मुकाबले “

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भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस की थर्ड वेव ने आहट दे दी है, मूल वायरस की तुलना में 50% अधिक घातक है.

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