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लॉकडाउन के एक साल बाद अमानवीयता

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जिन मजदूरों को फ्लाइट का महंगा किराया देकर बुलाया,

अब उनकी सैलरी से किश्तों में काट रहे पैसे, 100 लेबर अब तक कर चुके शिकायत

अपना काम निकालने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां छोटे कर्मचारियों का शोषण करने से भी बाज नहीं आती हैं। पिछले साल लॉकडाउन खुलने के बाद जिन मजदूरों को फ्लाइट का टिकट देकर काम पर बुलाया गया था। अब उनकी सैलरी से किराए के पैसे काटे जा रहे हैं। ऐसी 100 से ज्यादा शिकायतें अब तक झारखंड सरकार के पास आ चुकी हैं।

मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में काम करने वाले झारखंड के मजदूरों ने राज्य सरकार की हेल्पलाइन पर कंपनियों की शिकायत की है। झारखंड सरकार ने भी तत्काल ये जानकारी केंद्र सरकार और नीति आयोग को भेज दी है और इन राज्यों की सरकार से भी सख्त एक्शन लेने को कहा है।

लॉकडाउन में 9 लाख से ज्यादा मजदूर झारखंड लौटे
झारखंड सरकार के श्रम विभाग की तरफ से जारी आंकड़ों में लॉकडाउन के समय 9 लाख मजदूरों के लौटने की बात कही गई थी। ये आंकड़े मार्च 2020 से लेकर जुलाई 2020 के बीच के हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जो साइकिल से या पैदल चलकर भी वापस आए थे। महीनों अपने गांव में रहने के बाद जब रोजगार की व्यवस्था नहीं हुई तो ये मजदूर वापस महानगरों में लौट गए।

सैलरी से किराया काटना नियमों का उल्लंघन
श्रम विभाग की हेल्पलाइन को लीड कर रहे जॉनसन टोपनो ने बताया कि सैलरी से किराया काटना वेजेज एक्ट 1936 क उल्लंघन है। यह अमानवीय है। लॉकडाउन जैसी विषम परिस्थितियों में भी इस तरह का व्यवहार कहीं से जायज नहीं है। झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों से कंपनियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।

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