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अशोक गहलोत ने केंद्र और भाजपा सरकार पर साधा निशाना

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देश में लोकतंत्र को लेकर राहुल गांधी के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी उसी लाइन पर बयान दिया है।


गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कहा था भारत अब नहीं रहा लोकतांत्रिक देश।
उसी तर्ज पर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि आज देश में डेमोक्रेसी को ढूंढना पड़ रहा है। डेमाक्रेसी के सामने खतरे हैं। देश के हालात ऐसे बन गए हैं कि सारी एजेंसियां सरकार के शिकंजे में आ गई हैं। स्वायत्तशासी संस्थाएं जैसे चुनाव आयोग, न्यायपालिका, ईडी, आयकर पर शिकंजा कसा हुआ है। सरकार से कोई असहमत है तो उसे देशद्रोही करार दिया जा रहा है। पूरी दुनिया के मुल्कों में हमारे देश की बदनामी हो रही है। शुक्रवार सुबह गहलोत ने बजाज नगर से गांधी सर्किल तक प्रतीकात्मक दांडी यात्रा की। गहलोत ने यात्रा से पहले मीडिया से बातचीत में और फिर यात्रा के समापन पर भाषण में केंद्र सरकार को निशाने पर लिया।


गहलोत ने कहा- मोदीजी मोहन भागवत से सलाह कर लें। देश को एक रखना है, अखंड रखना है तो सही रास्ते पर आ जाएं। वरना जनता सही रास्ते पर ला देगी। आज अमेरिका स्वीडन में क्या लिखा जा रहा है। आप वास्तव में 56 इंच का सीना दिखाओ। आप सभी जाति वर्ग को साथ लेकर चलें। मोहन भागवत हिंदुओं की बात करते हैं और आज भी मानवता पर कलंक का प्रतीक छुआछूत है। मोहन भागवत और आरएसएस छुआछूत मिटाने पर काम करें। अगर वास्तव में वे खुद को हिंदू मानते हैं तो छुआछूत खत्म करें। भाजपा- आरएसएस हिंदू मुस्लिम के नाम पर लड़वाते हैं। बाद में ये दलित-गैर दलित के नाम पर लड़वाएंगे।

सीएम ने कहा- किसान आंदोलन पर अमेरिका यूरोप के देश क्या-क्या कह रहे हैं। वह पढ़ेंगे तो आपकी आंखें खुल जाएंगी। मोदीजी दुनिया में घूम रहे हैं लेकिन अब स्थिति उल्टी हो गई है। दुनिया के देशों में किसान आंदोलन को लेकर जो प्रतिक्रिया हो रही है, उम्मीद है विदेश मंत्री प्रधानमंत्री को सही सलाह देंगे। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है ​कि जिन किसानों ने देश की आजादी में हिस्सा लिया हो, उन किसानों के मामले में सरकार कृषि कानूनों पर जिद पकड़ बैठी है। सरकारों को कभी जिद नहीं करनी चाहिए। सरकारों को हमेशाा नतमस्तक होना चाहिए, जनता जनार्दन के सामने।

गहलोत ने आगे कहा कि कृषि कानूनों को लेकर गलतफहमी पैदा हो गई है तो क्या फर्क पड़ता है। छह माह के लिए कानून वापस ले लीजिए। राज्य सरकारों, किसानों से बात करके उन्हें विश्वास में लेकर फिर से नया कानून ले आइए। संवेदनहीनता की पराकाष्ठा हो चुकी है। किसानों को आंदोलन करते 4 माह ​हो गए, पूरे देश में गुस्सा है। इस पूरे मुद्दे में चार महीने से किसान ठंड में बैठे रहे। 200 से ज्यादा किसान मारे गए हैं। उनके परिवारों पर क्या बीती होगी। मोदी भी आज साबरमती से दांडी यात्रा शुरू कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि गांधीजी को याद कर मोदी के अंतर्मन को यह झकझोरेगा और शाम तक वे फैसला करें तो खुशी होगी।

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