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स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश के बाद हुई कार्रवाई, 5 अस्पतालों पर गिरी गाज

newsmrl.com Covid19 Update By Vishal Shahi Bhilai

भिलाई. कोविड से निजी अस्पतालों में दाखिल मरीजों में बहुत से बीमारों की मौत हो गई। वहीं बड़ी संख्या में मरीजों को गंभीर हालत में रेफर भी किया गया। इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने की बात स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य विभाग से कही थी। चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग ने इन मामलों में 5 निजी कोविड अस्पतालों को गुरुवार को निर्देश जारी कर नए कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने से मना कर दिया है। वहीं अस्पताल में दूसरी सेवाएं पहले की तरह जारी रखने की बात कही है।

स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश के बाद हुई कार्रवाई
सीएमएचओ, दुर्ग ने जारी आदेश में कहा है कि राज्य कोविड मृत्यु समीक्षा बैठक कार्रवाई विवरण के मुताबिक निजी कोविड अस्पतालों में जहां कोविड केसेस का उच्च मृत्यु दर व अधिक रेफरल रेट है उनको कोविड मैनेजमेंट के समस्त मानकों के अनुसार निरीक्षण कर कार्रवाई करने निर्देश जारी किए। दुर्ग जिले में निजी अस्पतालों को कोरोनावायरस कोविड-19 संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य उपचार के लिए दिया अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। वर्तमान में भर्ती मरीज का समुचित व्यवस्था चालू रहेगा। नए मरीज भर्ती नहीं करें।

इन 5 अस्पतालों पर गिरी गाज
सीएमएचओ, दुर्ग ने जिन अस्पतालों से कोविड-19 मरीजों के स्वास्थ्य उपचार के लिए दिए गए अनुमति को निरस्त किया है उनमें एसआर हॉस्पिटल, चिखली, मित्तल हॉस्पिटल, भिलाई, बीएम शाह हॉस्पिटल एण्ड मेडिकल रिसर्च सेंटर, शास्त्री नगर, सुपेला, भिलाई, आईएमआई हॉस्पिटल, खुर्सीपार समेत एक अन्य निजी कोविड अस्पताल शामिल है।

मोटी रकम लेने के बाद भी मरीजों ने दम तोड़ा
आंकड़ों पर नजर डालने से साफ होता है कि निजी अस्पतालों में मोटी फीस देने के बाद भी मरीजों को बचाया नहीं जा सका। इसके बाद ही इन अस्पतालों पर कार्रवाई करने स्टेट से जिला के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश मिले। स्वास्थ्य विभाग ने इसके बाद इस मामले में कार्रवाई करते हुए आदेश जारी किए।

लगातार मिल रही थी शिकायत
अस्पतालों के संचालकों का कहना है कि मरीजों को कोविड के अलावा दूसरी बीमारियां थी, जिसकी वजह से उनकी जान जा रही थी। मौत का कारण लापरवाही नहीं थी। वहीं जिन मरीजों की कोरोनाकाल में निजी अस्पताल में इलाज कराने के दौरान मौत हुई है, उनके परिजनों का कहना है कि मौत की बड़ी वजह अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और संक्रमण की डर से मरीज का नियमित देखरेख नहीं करना था।

बेड पड़ रहे थे कम
जिला में शासन से तय किए गए सरकारी कोविड केयर सेंटर में जब मरीजों को रखने जगह कम पड़ रही थी, तब चिंहित निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों का इलाज करने इजाजत दी गई। इसके बाद बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित निजी अस्पतालों में दाखिल होने लगे। इतना ही नहीं सरकारी कोविड केयर सेंटर के बेड खाली होने लगे।

अधिक शुल्क लेने की शिकायत
जिला प्रशासन से अनुमति मिलते ही निजी अस्पतालों ने शासन से तय शुल्क से अधिक रकम लेकर मरीजों को दाखिल करना शुरू किया। निजी कोविड अस्पतालों में दाखिल मरीजों की मौत होने लगी। तब जिला प्रशासन ने अलग-अलग निजी अस्पतालों के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए। इसके बाद भी अधिक शुल्क व लापरवाही बरते जाने के नाम पर निजी कोविड अस्पतालों में मरीज की मौत के बाद हंगामा हुआ। शिकायत थाना तक पहुंची

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